इथियोपिया के दौरे पर पीएम नरेंद्र मोदी: भारत–इथियोपिया के राष्ट्रगानों में दिखी सांस्कृतिक समानता

भारत–इथियोपिया के राष्ट्रगानों में दिखी सांस्कृतिक समानता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इथियोपिया दौरे ने भारत–अफ्रीका संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्तों को बेहद प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इथियोपिया आकर उन्हें घर जैसा महसूस हो रहा है और यह देश केवल अफ्रीका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गर्व का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत संसद सदस्यों और इथियोपियाई जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने इथियोपिया को “शेरों की भूमि” बताते हुए कहा कि यह देश साहस, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में खड़े होना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य और सम्मान की बात है, क्योंकि यह भूमि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक आकांक्षाओं का अद्भुत संगम है।


अपने भाषण में पीएम मोदी ने भारत और इथियोपिया के राष्ट्रगानों के बीच गहरी सांस्कृतिक समानता की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और इथियोपिया के राष्ट्रगान—दोनों में ही धरती को मां के रूप में पूजा गया है। यह समानता इस बात का प्रमाण है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देशों की आत्मा और मूल्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण ही किसी भी राष्ट्र की असली ताकत होती है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे इथियोपिया की संसद में 1.4 अरब भारतीयों की शुभकामनाएं और मित्रता का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने भारत को विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक बताते हुए कहा कि भारत और इथियोपिया दोनों ही देश अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोते हुए भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी ने भारत–इथियोपिया सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भी बात की। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, व्यापार और विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका को केवल साझेदार नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानता है और इथियोपिया इस रिश्ते में एक विशेष स्थान रखता है।
प्रधानमंत्री के इस संबोधन को न केवल कूटनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी का यह भाषण भारत और इथियोपिया के बीच सहयोग को नई दिशा देगा और दोनों देशों के रिश्तों को और गहराई प्रदान करेगा।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी का इथियोपिया की संसद में दिया गया यह संदेश भारत की वैश्विक सोच, सांस्कृतिक मूल्यों और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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