G7 Summit 2026: पीएम मोदी ने दुनिया को दिया भरोसे और समानता का संदेश

Neha Tripathi
1 दिन पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vivaan Gupta
1 दिन पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Krishna Yadav
1 दिन पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Aryan Malhotra
2 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Ananya Sharma
2 दिन पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) शहर में 15 से 17 जून 2026 तक आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की। इस वर्ष सम्मेलन की मेजबानी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर रहे हैं। सम्मेलन की थीम "Working Together to Address Major International Challenges" रखी गई है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सहयोग को मजबूत बनाना है।
G7 सम्मेलन में भारत की विशेष भागीदारी
हालांकि भारत G7 समूह का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन उसकी बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव को देखते हुए उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लेते हुए भारत का पक्ष मजबूती से रखा और विश्व समुदाय को भरोसे, सम्मान तथा समानता पर आधारित सहयोग का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि देशों के बीच विश्वास की कमी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण केवल आपसी भरोसे और साझा जिम्मेदारी से ही संभव है।
सम्मान और समानता पर आधारित हो वैश्विक साझेदारी
पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग ऐसा होना चाहिए जो किसी देश को दूसरे पर निर्भर न बनाए, बल्कि सभी देशों की गरिमा और हितों का सम्मान करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास और प्रगति के अवसर सभी राष्ट्रों को समान रूप से मिलने चाहिए। उनका यह संदेश भारत की ‘समान साझेदारी’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की विदेश नीति की झलक भी प्रस्तुत करता है।
यूक्रेन, पश्चिम एशिया और AI जैसे मुद्दों पर मंथन
G7 सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष, ईरान-इजराइल तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊर्जा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
भारत ने इन चर्चाओं में संवाद, सहयोग और बहुपक्षीय समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संकटों का समाधान किसी एक देश के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामूहिक प्रतिबद्धता और साझी जिम्मेदारी जरूरी है।
मोदी-ट्रंप बैठक पर वैश्विक नजरें
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की विस्तृत वार्ता होगी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में व्यापार, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिका-ईरान संबंध, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े विषय भी एजेंडे में शामिल रह सकते हैं।
वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
G7 सम्मेलन में भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि वैश्विक मंचों पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य में भारत एक भरोसेमंद साझेदार और संतुलित शक्ति के रूप में उभर रहा है। पीएम मोदी का संदेश केवल एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक साझेदारियों की दिशा तय करने वाला दृष्टिकोण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वास, समानता और सम्मान पर आधारित सहयोग की भारत की यह सोच आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई दिशा दे सकती है।







