विद्वान डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन: प्रधानमंत्री मोदी सहित देशभर के नेताओं ने जताया शोक

प्रधानमंत्री मोदी सहित देशभर के नेताओं ने जताया शोक
प्रतिक्रियाएँ
Riya Jain

Riya Jain

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

0 सेकंड पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Arjun Singh

Arjun Singh

50 मिनट पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Ada khan

Ada khan

1 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

CommentsReactionsFeedback

भारत के प्रख्यात संवैधानिक विशेषज्ञ, पूर्व लोकसभा महासचिव और संसदीय मामलों के विद्वान डॉ. सुभाष सी. कश्यप का गुरुवार को 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे डॉ. कश्यप ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक, संवैधानिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय लोकतंत्र के लिए उनकी सेवाओं को अविस्मरणीय बताया है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा दुख
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. सुभाष सी. कश्यप भारत के सबसे प्रमुख संवैधानिक विशेषज्ञों में से एक थे। उन्होंने कहा कि संसदीय और संवैधानिक विमर्श में उनका योगदान समाज को समृद्ध बनाने वाला रहा है। प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उनके लेखन को प्रेरणादायी बताते हुए परिवार एवं मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

 

राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया अपूरणीय क्षति
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने भी डॉ. कश्यप के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप ने भारतीय संविधान के अध्ययन और संसदीय प्रणाली के विकास को अपनी विद्वत्ता और दूरदर्शिता से समृद्ध किया। राष्ट्रपति ने उनके परिवार, प्रशंसकों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रकट की।

 

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा— संविधान का जीवंत विश्वकोश
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने डॉ. कश्यप को भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था का “जीवंत विश्वकोश” बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा महासचिव के रूप में उनकी विशिष्ट सेवाएं, संवैधानिक विषयों पर गहन अध्ययन और 100 से अधिक पुस्तकों का लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक रहेगा।

 

37 वर्षों तक संसद की सेवा
डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने वर्ष 1953 में लोकसभा सचिवालय से अपने संसदीय जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने लगभग 37 वर्षों तक संसद की सेवा की और 1984 से 1990 तक सातवीं, आठवीं तथा नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे। संसदीय प्रक्रियाओं, संवैधानिक कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें देश के सबसे विश्वसनीय संवैधानिक विशेषज्ञों में गिना जाता था।

 

पत्रकारिता से शुरू हुआ था पेशेवर सफर
10 मई 1929 को जन्मे डॉ. कश्यप ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। इसके बाद उन्होंने वकालत और अध्यापन के क्षेत्र में भी कार्य किया। भारतीय संविधान, संसदीय लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर उनके शोध और लेखन ने दशकों तक नीति-निर्माताओं, छात्रों और शोधकर्ताओं को दिशा प्रदान की।

 

‘एक देश-एक चुनाव’ समिति में भी निभाई अहम भूमिका
हाल के वर्षों में डॉ. कश्यप पूर्व राष्ट्रपति Ramnath Kovind की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति के सदस्य भी रहे, जिसे ‘एक देश-एक चुनाव’ के लिए कानूनी ढांचे की तैयारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनकी विशेषज्ञता का लाभ देश की कई महत्वपूर्ण संवैधानिक चर्चाओं और सुधारों में मिला।

 

लोकतांत्रिक विमर्श को समृद्ध करने वाली विरासत
डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने संविधान, संसदीय लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर 100 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उनकी पुस्तकें आज भी संवैधानिक अध्ययन और संसदीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ मानी जाती हैं। उनके निधन को भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक विमर्श के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

प्रतिक्रियाएँ
Riya Jain

Riya Jain

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Diya Gupta

Diya Gupta

0 सेकंड पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

0 सेकंड पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

Arjun Singh

Arjun Singh

50 मिनट पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Ada khan

Ada khan

1 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

CommentsReactionsFeedback

खबरे और भी है...