Abhijeet Dipke Announces Adivasi School Campaign: अभिजीत दीपके ने किया नए अभियान का ऐलान

Myra Dubey
10 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Riya Jain
10 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Sonu rai
11 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Harsh Pandya
12 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Vihaan Patel
13 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Anika Rajput
13 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Neel Saxena
14 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Pihu Agarwal
15 घंटे पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
Arjun Singh
16 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Anjali Patil
17 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Vaishali shinde
17 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार 16 सितंबर 2026 को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को लेकर नए अभियान की घोषणा की। उन्होंने बताया कि CJP का ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान 17 सितंबर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से शुरू किया जाएगा। ताजा रिपोर्टों के अनुसार अभियान का उद्देश्य आदिवासी छात्रों को मिलने वाली शिक्षा, आवासीय सुविधाओं और बुनियादी संसाधनों की स्थिति को सामने लाना तथा संबंधित सरकारी विभागों का ध्यान इन समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। अभियान के दौरान स्कूलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और छात्रों की समस्याओं की जानकारी जुटाने की बात कही गई है।
आदिवासी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदिवासी और आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कक्षाओं, शौचालय, पीने के पानी, बिजली, बिस्तर, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने मध्य प्रदेश के बालाघाट के एक आदिवासी स्कूल की तस्वीर का भी हवाला देते हुए सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके अभियान का फोकस केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं बल्कि वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की सुविधाओं की स्थिति की पड़ताल पर भी रहेगा। इससे पहले CJP ने अगस्त में महाराष्ट्र के हिंगोली से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया था और एक सरकारी स्कूल की बुनियादी सुविधाओं का ऑडिट करने की बात कही थी।
590 से ज्यादा मौतों का दीपके ने किया दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के आदिवासी और आश्रम स्कूलों को लेकर कई आंकड़े भी सामने रखे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र में 590 से अधिक आदिवासी छात्रों की मौत हुई है और इन घटनाओं को उन्होंने स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं की कमी से जोड़कर सवाल उठाए। हालांकि यह संख्या फिलहाल दीपके द्वारा किया गया दावा है, इसलिए इसे सरकारी रूप से प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह उन्होंने एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों को लेकर भी बड़ा दावा किया और 720 में से 477 स्कूलों के non-functional होने की बात कही। इन आंकड़ों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है।
गढ़चिरौली से शुरू होगा स्कूलों का जायजा
CJP के मुताबिक 17 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान में संगठन के प्रतिनिधि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे। अभियान के दौरान स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, छात्रों के रहने की व्यवस्था, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की जानकारी जुटाने की योजना बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार इस जानकारी को दर्ज कर संबंधित विभागों तक पहुंचाने और सुधार की मांग करने की बात कही गई है। गढ़चिरौली से अभियान शुरू करने का ऐलान हो चुका है और अब अगले चरण में यह अभियान महाराष्ट्र के दूसरे आदिवासी इलाकों तक ले जाने की बात कही गई है।
बालाघाट के बाद आदिवासी मुद्दों पर फोकस
अभिजीत दीपके हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत और वहां की स्वास्थ्य एवं बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने बालाघाट के एक आदिवासी स्कूल की स्थिति और क्षेत्र में पानी तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया था। इन मुद्दों के बीच अब महाराष्ट्र में ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान की घोषणा की गई है। बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहले ही राज्य सरकार से जवाब मांग चुका है, जबकि राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई कदमों की जानकारी दी गई है। इसलिए दीपके के अभियान में शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुख रहने की संभावना है।
आशा वर्कर्स और MPSC छात्रों का मुद्दा भी उठाया
नागपुर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके ने आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाली आशा वर्कर्स के वेतन से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया कि कुछ क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं को कई महीनों से भुगतान नहीं मिला है। इसके अलावा नागपुर पहुंचने से पहले उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के विरोध को भी समर्थन दिया था। इस तरह CJP के हालिया अभियान में शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी स्कूलों की सुविधाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्र मुद्दे एक साथ सामने आ रहे हैं। अब 17 सितंबर से गढ़चिरौली में शुरू होने वाला अभियान इन दावों और स्थानीय स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी।








