Balaghat Tribal Children Death Case: बालाघाट में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत

बालाघाट में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत
प्रतिक्रियाएँ
Anjali Patil

Anjali Patil

0 सेकंड पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

CommentsReactionsFeedback

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बीमार बच्चों के सामने आने से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका और ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर बैगा और गोंड समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। रिपोर्टों में मई 2026 से प्रभावित इलाकों में बच्चों की मौत और लगातार बीमारी की बात कही गई है। हालांकि इन सभी मौतों का अंतिम चिकित्सकीय कारण अभी न्यायिक प्रक्रिया में जांच और सरकारी रिपोर्टों का विषय है।


हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
बालाघाट के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में प्रभावित गांवों की जमीनी स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े तथ्य अदालत के सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक याचिकाकर्ता ने खुद प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्राउंड रिपोर्ट और अन्य सामग्री अदालत में प्रस्तुत की। कोर्ट ने सरकार को संबंधित सर्वे रिपोर्ट और स्थिति से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई आगे भी जारी है।


बीमारी और कुपोषण ने बढ़ाई चिंता
प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के बीमार पड़ने के साथ कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर भी चिंता सामने आई है। रिपोर्टों में खसरा और मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका तथा बच्चों के लगातार अस्पताल पहुंचने का उल्लेख है। एक रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण से भी प्रभावित हैं और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में मौतों के वास्तविक कारणों की चिकित्सकीय जांच और आधिकारिक आंकड़ों का महत्व बढ़ गया है।

 

दूषित पानी को लेकर भी सवाल
ग्राउंड रिपोर्ट और याचिका में प्रभावित गांवों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ स्थानों पर हैंडपंप के पानी के खराब या पीले दिखाई देने की शिकायतों का उल्लेख हुआ है। हालांकि उपलब्ध न्यायिक और सरकारी रिपोर्टों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि दूषित पानी ही बच्चों की मौत का मुख्य कारण था। पानी की गुणवत्ता, बीमारी के कारण और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर जांच तथा सरकारी रिपोर्ट सामने आना बाकी है।


सरकार ने उठाए स्वास्थ्य संबंधी कदम
मामले के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बालाघाट में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदमों की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की और 67 नए मेडिकल ऑफिसर पदस्थ करने की जानकारी दी। सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ₹2 करोड़ मंजूर करने के साथ दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक सब-हेल्थ सेंटर और दो मोबाइल मेडिकल यूनिट स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण पूरा कराने और दूरदराज क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।


अब मौतों के कारणों की जांच पर नजर
बालाघाट का यह मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था, कुपोषण, टीकाकरण, बीमारी की पहचान और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच से जुड़े कई सवाल सामने ला रहा है। हाईकोर्ट में सरकार का जवाब और संबंधित सर्वे रिपोर्ट आने के बाद स्थिति की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल 30 से अधिक बच्चों की मौत का आंकड़ा याचिका और विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है, जबकि प्रशासनिक और चिकित्सकीय स्तर पर मौतों के कारणों तथा प्रभावित बच्चों की स्थिति की जांच जारी है। सरकार की ओर से घोषित स्वास्थ्य उपायों के अमल और अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट पर अब निगाह रहेगी।

 

प्रतिक्रियाएँ
Anjali Patil

Anjali Patil

0 सेकंड पहले

Yeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.

Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

CommentsReactionsFeedback