भारत में शुरू होंगे 5 स्वदेशी छोटे परमाणु रिएक्टर: SMR मिशन से बदलेगा भारत का ऊर्जा भविष्य

Sonu rai
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Simran Arora
3 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Neel Saxena
5 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Vihaan Patel
5 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Taushif Shekh
5 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Ritika Ghosh
7 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Dev Kapoor
8 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Kunal Rao
8 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Pranav Srivastava
10 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anil Sen
10 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ananya Sharma
10 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत वर्ष 2033 तक पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) शुरू करने का लक्ष्य तय किया है।संसद में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए 20,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। यह पहल भारत के नेट-जीरो लक्ष्य और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य वर्तमान 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 2031-32 तक लगभग 22 गीगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट तक पहुंचाना है।इस मिशन के तहत छोटे परमाणु रिएक्टर देश की बिजली जरूरतों को स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराएंगे। इससे कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी तथा ऊर्जा क्षेत्र अधिक टिकाऊ बनेगा।
BARC तैयार कर रहा तीन स्वदेशी रिएक्टर डिजाइन
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) तीन आधुनिक स्वदेशी रिएक्टर डिजाइनों पर काम कर रहा है। इनमें BSMR-200 (220 मेगावाट) और SMR-55 (55 मेगावाट) को महाराष्ट्र के तारापुर में विकसित करने की मंजूरी मिल चुकी है।वहीं 5 मेगावाट थर्मल HTGCR रिएक्टर को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थापित किया जाएगा, जिसका उपयोग स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जाएगा। यह तकनीक भविष्य की ग्रीन एनर्जी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निजी निवेश से मिलेगी नई रफ्तार
सरकार ने SHANTI Act 2025 के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश का रास्ता भी खोल दिया है।रिपोर्ट के अनुसार टाटा पावर, रिलायंस और अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों ने इस क्षेत्र में रुचि दिखाई है। निजी भागीदारी से परियोजनाओं की गति तेज होने और अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग की संभावना बढ़ेगी।
पारंपरिक रिएक्टरों से अधिक सुरक्षित और किफायती
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर आकार में पारंपरिक परमाणु संयंत्रों से छोटे होते हैं और इन्हें फैक्ट्री में तैयार कर साइट पर आसानी से स्थापित किया जा सकता है। इससे निर्माण लागत और समय दोनों में कमी आती है।इनमें Passive Safety System जैसी आधुनिक सुरक्षा तकनीक होती है, जो किसी आपात स्थिति या बिजली बाधित होने पर भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के रिएक्टर को सुरक्षित बनाए रखती है। यही वजह है कि इन्हें भविष्य की परमाणु तकनीक माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि SMR तकनीक भारत के ऊर्जा संक्रमण में गेम चेंजर साबित हो सकती है। इन रिएक्टरों को पुराने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों की जगह भी स्थापित किया जा सकता है, जिससे मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा।इसके अलावा स्टील, सीमेंट, एल्यूमीनियम और हाइड्रोजन जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध होगी। इससे कार्बन उत्सर्जन घटेगा, औद्योगिक उत्पादन अधिक टिकाऊ बनेगा और भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में मजबूत बढ़त मिलेगी।







