युवा रवि मिश्रा की आवाज आखिर कब सुनेगा प्रशासन? : बरसात में बदहाल सड़कें, पेंशन और पानी की समस्या बनी चिंता
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बिरोड़ी के विकास की लड़ाई: युवा रवि मिश्रा की आवाज आखिर कब सुनेगा प्रशासन?
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की जैतपुर विधानसभा अंतर्गत ग्राम बिरोड़ी इन दिनों मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर चर्चा में है। गांव के युवा रवि मिश्रा लगातार सोशल मीडिया और प्रशासनिक कार्यालयों के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं को उठाकर समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गांव में वृद्धा पेंशन, सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। बरसात शुरू होते ही गांव की सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
समस्या
सड़क, पानी, बिजली और वृद्धा पेंशन की समस्या वर्षों से बनी हुई है।
बरसात में सड़कें कीचड़ और गड्ढों से भर गई हैं।
बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
संघर्ष
युवा रवि मिश्रा लगातार ग्रामीणों की आवाज प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं।
पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार आवेदन और शिकायत देने का दावा किया जा रहा है।
गांव के विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नाराजगी
ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
लोगों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए विकास के वादे अब तक पूरे नहीं हुए।
बरसात में बदहाल सड़कें और अधूरी सुविधाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं।
युवा रवि मिश्रा लगातार सोशल मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से ग्रामीणों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक कई बार शिकायत और आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका दावा है कि वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने गांव के विकास और ग्रामीणों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में कई बुजुर्गों को समय पर वृद्धा पेंशन नहीं मिल रही है। पेंशन उनके जीवनयापन का महत्वपूर्ण सहारा है, लेकिन भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पेयजल और बिजली की अनियमित व्यवस्था भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
सबसे अधिक दिक्कत बरसात के मौसम में देखने को मिल रही है। गांव की सड़कें जगह-जगह से टूट चुकी हैं। कीचड़ और गड्ढों के कारण स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बीमार लोगों के लिए घर से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़ जाए तो ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय गांव के विकास, बेहतर सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज भी गांव उन्हीं समस्याओं से जूझ रहा है। उनका आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
युवा रवि मिश्रा का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गांव की वास्तविक समस्याओं को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को उनका अधिकार और बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। वे लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से गांव की तस्वीरें और समस्याएं साझा कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब गांव के लोगों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांग है कि गांव का निरीक्षण कर सड़क, पेयजल, बिजली और लंबित पेंशन जैसी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
ग्रामीणों के प्रमुख सवाल
बरसात में बदहाल सड़क की जिम्मेदारी कौन लेगा?
वृद्धा पेंशन का भुगतान समय पर क्यों नहीं हो रहा?
चुनाव के समय किए गए विकास के वादे आखिर कब पूरे होंगे?
क्या जिम्मेदार अधिकारी गांव का दौरा कर समस्याओं का समाधान करेंगे?

