तमिलनाडु में विधायक खरीदफरोख्त का आरोप: 35 से 50 करोड़ रिश्वत केस में 9 गिरफ्तार

Riya Jain
0 सेकंड पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Aditya Verma
1 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
तमिलनाडु की राजनीति में कथित विधायक खरीद-फरोख्त का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सत्तारूढ़ टीवीके (TVK) के विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी बदलने या विधानसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने के लिए ₹35 करोड़ से ₹50 करोड़ तक की रिश्वत की पेशकश की गई। इस आरोप के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपों को लेकर दोनों प्रमुख दल आमने-सामने हैं।
पूर्व मंत्री समेत कई लोगों पर केस
विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी तथा उनके भाई वी. अशोक कुमार को मुख्य आरोपियों के रूप में नामजद किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है। मामले में कथित साजिश और आर्थिक लेन-देन के पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। आरोपियों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी
चेन्नई सिटी पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) ने मामले में कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती चरण में तीन आरोपियों को पकड़ा गया था, जबकि जांच आगे बढ़ने पर गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पूछताछ के आधार पर आगे और कार्रवाई संभव है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं।चेन्नई पुलिस ने मुख्य आरोपी पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को पूछताछ के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन भेजा है।
अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा विवाद
यह पूरा विवाद विधानसभा में स्पीकर के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि सरकार के विधायकों को विपक्ष के पक्ष में मतदान कराने के लिए कथित रूप से धन का प्रलोभन दिया गया। हालांकि इस पूरे मामले में जांच अभी जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विधानसभा की गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
सत्तारूढ़ टीवीके सरकार का आरोप है कि विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर डीएमके ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जनता का ध्यान अन्य मुद्दों से हटाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। मामला अब राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
जांच के नतीजों पर टिकी नजर
विधायक रिश्वत प्रकरण की जांच फिलहाल जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का असर तमिलनाडु की राजनीति और विधानसभा की कार्यवाही पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो मामले में और भी सख्त कार्रवाई संभव है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।








