50 किलो गांजा बरामद, तस्करी पर सवाल: नशे के नेटवर्क पर सवाल

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कटनी में 50 किलो गांजा बरामद, तस्कर फरार; आखिर किसकी निगरानी में फल-फूल रहा नशे का कारोबार?
मध्य प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी अब एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। आए दिन प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी की खबरें सामने आ रही हैं। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नशे का यह कारोबार इतनी आसानी से कैसे संचालित हो रहा है?
ताजा मामला कटनी जिले के माधवनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत झिंझरी पुलिस चौकी का है, जहां पुलिस ने घेराबंदी कर बिना नंबर की सफेद स्विफ्ट डिजायर कार से 50 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया है। जब्त गांजे और वाहन की कुल अनुमानित कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई जा रही है।
पुलिस को देखकर चालक कार छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर तलाशी ली, जिसमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार चालक और तस्करी से जुड़े संभावित नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
लेकिन सवाल सिर्फ एक कार से 50 किलो गांजा मिलने का नहीं है। सवाल उस पूरे नेटवर्क का है, जो आखिर कहां से नशीले पदार्थों की खेप ला रहा है और किन रास्तों से इसकी सप्लाई हो रही है?
प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या तस्करों तक पहुंचने वाली कड़ियों की गहराई से जांच हो रही है? क्या सिर्फ माल जब्त करना पर्याप्त है, या इस अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय बड़े चेहरों तक पहुंचना भी जरूरी है?
नशे का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। जरूरत है कि कार्रवाई केवल बरामदगी तक सीमित न रहे, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क को उजागर कर उसके संचालन पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
अब जनता जानना चाहती है—आखिर कब थमेगा नशे का यह कारोबार और कब बेनकाब होंगे इसके पीछे छिपे चेहरे?

