चंडीगढ़-पंचकूला में CBI की ताबड़तोड़ रेड: 590 करोड़ बैंकिंग घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन

Ishaan Tiwari
7 घंटे पहलेYeh khabar sabko share karni chahiye!
Aarav Sharma
8 घंटे पहलेItni important news, dosto ko zaroor bhejo.
Pranav Srivastava
8 घंटे पहलेYeh padh ke ankhe khul gayi, sabko dikhao.
Myra Dubey
13 घंटे पहलेIska aage kya hoga? Koi update milega kya?
हरियाणा से जुड़े चर्चित 590 करोड़ रुपए के बैंकिंग और सरकारी फंड घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा एक्शन लिया है। IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े इस मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला के 7 अलग-अलग ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत बरामद किए हैं।
CBI की इस कार्रवाई के बाद हरियाणा के प्रशासनिक और बैंकिंग हलकों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी अब इस घोटाले के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
16 आरोपी गिरफ्तार, कई और लोगों पर नजर
इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में अब तक 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ बैंक फ्रॉड नहीं बल्कि सरकारी फंड के संगठित दुरुपयोग का बड़ा मामला हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि कई बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की फॉरेंसिक जांच जारी है।
सरकारी विभागों के फंड में गड़बड़ी का आरोप
CBI जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों के सरकारी फंड को कथित रूप से फर्जी खातों और संदिग्ध भुगतान के जरिए डायवर्ट किया गया। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों और कारोबारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपए का गबन किया।
जांच की जद में आए विभागों में पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम और पंचकूला नगर निगम जैसे अहम विभाग शामिल बताए जा रहे हैं।
कैसे काम करता था ‘फर्जी खातों का नेटवर्क’?
जांच एजेंसियों के अनुसार, सरकारी भुगतान को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर असली लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था। कुछ खाते केवल ट्रांजेक्शन रूट बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए ताकि पैसों के स्रोत और गंतव्य को छिपाया जा सके।
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क को किस स्तर तक संरक्षण मिला और क्या सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे प्रभावशाली लोगों की इसमें सीधी भूमिका थी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल डेटा बने अहम सबूत
इस मामले में कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल रिकॉर्ड जांच की सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आए हैं। सूत्रों का दावा है कि रिकॉर्डिंग में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने की रणनीति पर बातचीत के संकेत मिले हैं।
CBI अब इन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच करवा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बातचीत कब हुई, किन लोगों के बीच हुई और पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई थी जांच
जानकारी के मुताबिक, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच शुरू की थी। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे CBI को सौंप दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि सरकार ने पांच आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी भी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कई वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है।
प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी बेचैनी
CBI की छापेमारी के बाद कई सरकारी विभागों में पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और भुगतान फाइलों की समीक्षा शुरू हो गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने की चर्चाओं ने नौकरशाही में तनाव बढ़ा दिया है।
माना जा रहा है कि यह मामला सिर्फ बैंक फ्रॉड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सरकारी सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

