दिल्ली के जनकपुरी के प्राइवेट स्कूल का मामला: 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोप

Myra Dubey
5 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Kavya Mishra
8 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Reyansh Joshi
10 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Arjun Singh
10 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Vaishali shinde
13 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके स्थित SS Mota Singh Public School से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल परिसर में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ 57 वर्षीय स्कूल कर्मचारी ने दुष्कर्म किया। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल के दूसरे दिन बच्ची ने बताई आपबीती
परिवार के अनुसार बच्ची 30 अप्रैल को स्कूल के दूसरे दिन गई थी। घर लौटने के बाद उसने दर्द की शिकायत की। जब मां ने उससे पूछताछ की, तो बच्ची ने कथित तौर पर बताया कि स्कूल के एक अलग हिस्से में ले जाकर उसके साथ गलत हरकत की गई।
बच्ची की बात सुनते ही परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद 1 मई को जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। मेडिकल जांच के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
बच्ची की पहचान के बाद आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान बच्ची ने आरोपी की पहचान की, जिसके बाद 57 वर्षीय स्कूल केयरटेकर को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। हालांकि, इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब 7 मई को द्वारका अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी। इतने गंभीर पॉक्सो मामले में कुछ ही दिनों में बेल मिलने पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
परिवार ने स्कूल और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले में स्कूल की एक टीचर की भूमिका भी संदिग्ध है। परिवार ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत उचित कार्रवाई नहीं की और उन्हें घंटों थाने में इंतजार कराया गया। परिवार ने यह भी दावा किया कि इलाके के डीसीपी ने उन्हें धमकाया। इन आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से बड़ा रूप ले लिया है।
पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शिकायत मिलते ही तुरंत मेडिकल जांच कराई गई और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि डीसीपी (पश्चिम) कभी पीड़ित परिवार से मिले ही नहीं और धमकाने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
आरोपी को बेल मिलने पर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
Saurabh Bharadwaj ने आरोपी को जमानत मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि एक 3 साल की बच्ची के साथ स्कूल परिसर में ऐसा अपराध होना बेहद भयावह है और आरोपी को इतनी जल्दी जमानत मिलना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश की गई।
बच्चों की सुरक्षा पर फिर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, स्टाफ वेरिफिकेशन और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्कूल प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। परिवार ने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है ताकि पूरे मामले को विस्तार से रखा जा सके।







