उज्जैन जमीन विवाद: CM मोहन यादव के परिवार की 168 एकड़ जमीन खरीद पर सियासत तेज

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेItni important news, dosto ko zaroor bhejo.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेEkdum sahi aur balanced news hai yeh.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेBreaking news! Sabko is baare mein pata hona chahiye.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेSach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.
Saanvi Pandey
1 घंटे पहलेEkdum sahi aur balanced news hai yeh.
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उज्जैन की जमीनों को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में 168 एकड़ से अधिक जमीन खरीदी है। आरोप है कि इनमें से अधिकांश जमीनें उन इलाकों में स्थित हैं जहां बाद में सरकार ने सड़क, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणाएं कीं। इस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार हमलावर है, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई है। दावा किया गया है कि इनमें से कई भूखंड उन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां बाद में सड़क निर्माण, हाईवे कनेक्टिविटी और सिंहस्थ 2028 से जुड़ी विकास योजनाओं की घोषणा हुई।
उज्जैन बना निवेशकों की पहली पसंद
महाकाल लोक परियोजना के बाद उज्जैन मध्य प्रदेश का तेजी से विकसित होने वाला शहर बनकर उभरा है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों ने यहां रियल एस्टेट, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति दी है। शहर के विस्तार और मास्टर प्लान 2035 के कारण जमीनों की मांग और कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
किन लोगों के नाम पर खरीदी गई जमीनें?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खरीदे गए कई प्लॉट मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज हैं। इनमें उनकी पत्नी सीमा यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव, नारायण यादव, रेखा यादव, अभय यादव तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार और रिश्तेदारों के पास कुल 245 प्लॉट हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 335 एकड़ बताया गया है।
विकास परियोजनाओं के पास जमीन होने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ भूमि उन इलाकों के आसपास है, जहां सड़क और हाईवे परियोजनाओं की घोषणा की गई। इनमें गरोठ, नागदा, बड़नगर, इंदौर और भोपाल से जुड़ी परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही कुछ जमीनें उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि से आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में होने का दावा किया गया है।
कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विकास योजनाओं की जानकारी का लाभ उठाकर जमीनों में निवेश किया गया। पार्टी ने इस मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और मुख्यमंत्री परिवार की संपत्तियों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
कांग्रेस के पांच प्रमुख सवाल
क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार ने जमीन खरीदी?
क्या जमीनें विकास परियोजनाओं वाले क्षेत्रों में हैं?
क्या सरकार परियोजनाओं की पूरी टाइमलाइन सार्वजनिक करेगी?
क्या स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाएगी?
क्या मुख्यमंत्री परिवार की जमीनों पर श्वेत पत्र जारी करेंगे?
CMO ने दी सफाई
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव ने कोई नई जमीन नहीं खरीदी है। CMO के अनुसार मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और इस मामले पर विस्तृत जवाब भी जारी किया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
सिंहस्थ 2028 और लैंड पूलिंग विवाद से जुड़ रहा मामला
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इसी दौरान लैंड पूलिंग और भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान संगठनों का विरोध भी सामने आया था। ऐसे समय में जमीन खरीद को लेकर सामने आए आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
जांच और पारदर्शिता की मांग बढ़ी
विपक्ष इस पूरे मामले में न्यायिक जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि सरकार आरोपों को निराधार बता रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार की ओर से विस्तृत जवाब कब आता है और क्या इस मामले में किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा की जाती है।



