Ujjain Hanuman idol: खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली
Myra Dubey
7 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Krishna Yadav
7 घंटे पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Priya Iyer
10 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Monika Das
11 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Pooja Reddy
11 घंटे पहलेKarma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.
Anil Sen
14 घंटे पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Ritika Ghosh
14 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Harsh Pandya
14 घंटे पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
Navya Nair
16 घंटे पहलेRishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.
उज्जैन के सती गेट क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर सड़क चौड़ीकरण के काम की जद में आया है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत मंदिर के बाहरी ढांचे को हटाया गया, लेकिन मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। स्थानीय स्तर पर इस मंदिर को करीब 170 साल पुराना बताया जा रहा है, हालांकि प्रतिमा और मंदिर की वास्तविक ऐतिहासिक उम्र को लेकर विशेषज्ञ जांच की जरूरत बताई गई है।
भारी मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद नहीं हिली प्रतिमा
प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम की ओर से कई प्रयास किए गए। रिपोर्टों के अनुसार क्रेन, जेसीबी और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद लेने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रयासों की अवधि दो दिन से लेकर पांच और कुछ मामलों में इससे अधिक बताई गई है, इसलिए निश्चित रूप से केवल तीन दिन का दावा करना उचित नहीं है। लगातार असफल प्रयासों के बाद प्रशासन ने फिलहाल प्रतिमा को लेकर आगे की कार्रवाई को विशेषज्ञों की तकनीकी जांच से जोड़ दिया है।
श्रद्धालु इसे मान रहे हैं बजरंगबली का चमत्कार
प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर आस्था और उत्सुकता बढ़ गई है। कई भक्त इसे बजरंगबली की इच्छा और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं और मंदिर स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ स्थानों पर भक्तों की ओर से भजन-कीर्तन किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि प्रतिमा के स्थिर रहने के पीछे धार्मिक या चमत्कारिक कारण होने की पुष्टि किसी वैज्ञानिक जांच से अभी नहीं हुई है।
अब तकनीकी जांच से कारण जानने की कोशिश
प्रतिमा को हटाने में लगातार आ रही दिक्कत के बाद मामले में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम को भी निरीक्षण और तकनीकी अध्ययन के लिए जोड़ा गया है। विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्रतिमा की संरचना, आधार और जमीन से उसका जुड़ाव किस तरह का है और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद उसे स्थानांतरित करना क्यों संभव नहीं हो पाया। तकनीकी अध्ययन के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने या यथास्थान रखने को लेकर आगे का निर्णय लिया जा सकता है।
मंदिर की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे
खड़े हनुमान मंदिर की उम्र को लेकर फिलहाल करीब 170 साल पुराना होने की स्थानीय मान्यता और मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में प्रतिमा को इससे भी अधिक प्राचीन बताते हुए परमार या राजा भोज के काल से जोड़ने के दावे किए गए हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक ऐतिहासिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए प्रतिमा की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ या पुरातात्विक जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा। यही वजह है कि प्रशासन भी प्रतिमा के साथ आगे की कार्रवाई में सावधानी बरत रहा है।
आस्था और विकास के बीच प्रशासन के सामने चुनौती
खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था, विरासत संरक्षण और विकास के बीच संतुलन का विषय बन गया है। एक ओर सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य तेजी से चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिमा से श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। तकनीकी जांच के परिणाम यह तय करने में अहम हो सकते हैं कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या उसे वर्तमान स्थान पर ही संरक्षित रखने का विकल्प अपनाया जाए। फिलहाल श्रद्धालुओं की नजर प्रशासन और विशेषज्ञों की अगली रिपोर्ट पर बनी हुई है।



