7 कलाकृतियाँ और स्थापत्य जो इतिहास में अधूरे रह गए: अधूरी विरासतें: वे कलाकृतियाँ और निर्माण जो बनते-बनते रह गए..

अधूरी विरासतें: वे कलाकृतियाँ और निर्माण जो बनते-बनते रह गए..

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कला और स्थापत्य के कई बेजोड़ नमूने आज हमें देखने को मिलते हैं. लेकिन यह सूची और भी लम्बी हो सकती थी. दुनिया की कई ऐसी कलाकृतियाँ हैं जो बस बनते बनते रह गई थी. ऐसी ही कुछ कलाकृतियों के बारे में जानकारी - 

सोवियत किला:
सोवियत संघ के निति निर्धारक एक ऐसी इमारत बनाना चाहते थे जो पूरी दुनिया मे बेजोड़ हो. सोवियत किला या द पैलेस ऑफ सोवियत्स दुनिया की सबसे ऊँची इमारत होनी थी. इस इमारत के अंदर संसद और प्रबंधन कार्यालय बनने वाले थे. यह इमारत कितनी महत्वपूर्ण थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस इमारत को डिजाइन करने के लिए प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था और कोई 272 डिजाइनें देश भर से प्राप्त हुई थी.
बोरिस इयाफान नामक एक स्थापत्यविद ने यह प्रतियोगिता जीत ली थी. उसकी डिजाइन के आधार पर इमारत का निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था. यह 1937 की बात है. 1941 आते आते इस इमारत के स्टील फ्रेम का काम पूरा हो चुका था. लेकिन तभी द्वितीय विश्वयुद्ध छीड़ गया और इमारत का निर्माण कार्य स्थगित हो गया.
सोवियत संघ ने इमारत की स्टील फ्रेम को उखाड़ कर उसका इस्तेमाल मोस्को के आसपास रेलवे लाइन बनाने में किया. द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद बीच बीच में खबर आती रही कि अब इस इमारत का निर्माण कार्य फिर से शुरू होगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. यह इमारत कभी नहीं बनी.

ब्रुस ली की गेम ऑफ डैथ:
महान मार्शल आर्ट विशेषज्ञ ब्रुस ली ने युँ तो कई यादगार फिल्में दी हैं, लेकिन वे एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो जीत क्यून ड्यू नामक मार्शल कला की विशिष्टता को प्रदर्शित करती. ब्रुस ली ने इस फिल्म का नाम गेम ऑफ डैथ रखा था और इसकी शूटिंग शुरू भी हो गई थी.
लेकिन जब तक ली ने यह फिल्म आधी समाप्त की तब तक उन्हें एंटर द ड्रेगन नामक फिल्म में काम करने का न्यौता मिल गया. ली ने अपनी फिल्म छोड़कर यह दूसरी फिल्म करने की ठानी. एंटर द ड्रेगन एक सुपरहीट फिल्म थी जिसने ली की लोकप्रियता को चार चाँद लगा दिए.
लेकिन ब्रुस ली अपनी फिल्म गेम ऑफ डैथ को भूले नहीं थे. वे उसकी शूटिंग पूरा करना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही 32 वर्ष की उम्र मे उनकी रहस्यमय संजोगों में मौत हो गई.
उनकी मौत के 5 साल बाद एंटर द ड्रेगन के निर्देशक ने गेम ऑफ डैथ नामक फिल्म पूरी जरूर की लेकिन लोगों की नजर में वह ब्रुस ली की फिल्म नहीं थी. लोग कहते हैं ब्रुस ली जो फिल्म बनाना चाहते थे वह कभी नहीं बन सकी. 

चार्ल्स डिकंस की द मिस्ट्री ऑफ एडविन ड्रूड:
अ टेल ऑफ टु सिटीज़ जैसी उपन्यास के लेखक चार्ल्स डिकंस अंग्रेजी साहित्य के एक अति लोकप्रिय लेखक थे. उनकी अंतिम किताम द मिस्ट्री ऑफ एडविन ड्रूड एक रहस्य कथा थी, जिसमें एक खून हो जाता है. लेकिन इससे पहले कि चार्ल्स यह किताब पूरी करते 58 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई.चार्ल्स के जाने के बाद कई लोगों ने इस कहानी को पूरा करने की कोशिश की लेकिन उनमें वह बात नहीं थी जो चार्ल्स की लेखनी में थी. चार्ल्स की यह कहानी अधुरी ही रह गई. 

ज्योर्ज वाशिंगटन का चित्र:
अमेरिकी 1 डॉलर के नोट पर ज्योर्ज वाशिंगटन का पोट्रेट है वह गिल्बर्ट स्टुअर्ट नामक चित्रकार का बनाया हुआ है. इस चित्रकार ने कई राजाओं और राष्ट्रपतियों के चित्र बनाए थे. इस चित्र का नाम द एथेनियम रखा गया था.
बहुत कम लोग जानते हैं कि यह चित्र वास्तव में अधुरा है और गिल्बर्ट ने जानबुझ कर इस चित्र को कभी पूरा नहीं किया. गिल्बर्ट इस चित्र को कभी पूरा नहीं करना चाहता था ताकी कोई अन्य व्यक्ति उस चित्र का इस्तेमाल ना कर सके. यहाँ तक कि खुद ज्योर्ज वाशिंगटन के कहने का भी उस पर कोई असर नहीं हुआ. 1828 में स्टुअर्ट की मौत हो गई और यह चित्र तब भी अधुरा ही छूटा हुआ था.

दा विंची का ग्रान केवालो:
महान चित्रकार, स्थापत्यविद, वैज्ञानिक, इंजीनियर होने के साथ साथ कुशल शिल्पी भी थे. मिलान के ड्यूक ने अपने पिता की याद में एक शिल्प तैयार करने की जिम्मेदारी दा विंची को दी थी.
दा विंची ने एक घोड़े की मूर्ति बनाने का कार्य शुरू किया. यह कोई ऐसी वैसे मूर्ति नहीं होनी थी इसलिए दा विंची ने पूरे 12 साल इस मूर्ति के डिजाइन को जाँचने परखने बदलने के बाद 1492 में 23 फूट ऊँचा एक क्ले का ढाँचा तैयार किया और उसे मिलान के ड्यूक के समक्ष प्रस्तुत किया.
यह क्ले मॉडल इतना सुंदर था कि सबके आँखे खुली की खुली रह गई. लेकिन जब तक कि इस क्ले मोडल के ऊपर पित्तल की परत लगाने का कार्य शुरू होता फ्रांस और इटाली के बीच युद्ध छिड़ गया. मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पित्तल का उपयोग हथियार बनाने में हुआ.
दा विंची की यह मूर्ति फिर कभी ना बन सकी. 

ताजमहल [काला ताजमहल]:
मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनाए गए ताजमहल को अधुरा माना जा सकता है. क्योंकि किवंदिती है कि शाहजहाँ सफेद संगमरमर से बने ताजमहल के निकट एक काला ताजमहल भी बनाना चाहते थे. अपनी बेगम मुमताज़ की याद में उन्होने सफेद ताजमहल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था. मुमताज़ की कब्र इस ताजमहल में थी.
एक फ्रेंच व्यापारी तवेनियर ने लिखा है कि – “शाहजहाँ यमुना के दूसरे किनारे एक और ताजमहल बनाने जा रहे थे जो काले रंग का होता. यहाँ शाहजहाँ खुद की कब्र बनाते. लेकिन तभी उनके पुत्र औरंगजेब ने युद्ध छेड़कर अपने पिता को बंदी बना लिया.’
शाहजहाँ की ईच्छा कभी पूरी ना हो सकी. काला ताजमहल कभी नहीं बना.

कोलेरिज़ की कुब्ला खान:
प्रसिद्ध कवि सैम्यूअल टेलर कोलेरिज ने कुब्ला खान नामक काव्य रचना 1797 में लिखनी शुरू की थी. उस समय वे इंगलैंड के एक फार्महाउस में आराम करने आए हुए थे. एक दिन पूर्वी देशों की एक किताब पढते पढते उन्हें नींद आ गई और सपने में उन्होनें कुछ काव्य पंक्तियाँ सोची.
नींद से जागते ही उन्होनें सपने में सोची गई कविता को लिखना शुरू कर दिया. उनकी कविता की 300 पंक्तियाँ होनी थी. उन्होने करीब 50 पंक्तियाँ लिखी तभी उनके एक मित्र ने उनको आवाज़ दी और कोलेरिज उस मित्र के साथ निकल पड़े.
वापस लौट कर उन्होने अपनी कविता पूरी करने की कोशिश की लेकिन यह सम्भव नहीं हुआ. कोलेरिज कविता भूल चुके थे और लाख कोशिश करने के बावजूद उन्हें कुछ याद नहीं आया ना ही कुछ सुझा. कुब्ला खान कविता अधुरी रह गई.

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