मोरबी में पावर प्रोजेक्ट को लेकर किसानों का आंदोलन: मुआवजे की मांग पर चौथे दिन भी जारी रहा विरोध
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेSamaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Payal jadon
1 घंटे पहलेAise logon ko support karna humara farz hai.
Krishna Yadav
2 घंटे पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
गुजरात के मोरबी जिले के जेतपर गांव में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट और बिजली के खंभों के लिए भूमि उपयोग के मुद्दे पर किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, अपनी जमीन, खेती और आजीविका को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदर्शन करती दिखाई दे रही हैं। किसानों का आरोप है कि परियोजना के लिए उनकी भूमि का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसके बदले उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा, लाठीचार्ज के दावे पर बहस
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों और महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की तथा तनावपूर्ण माहौल जैसे दृश्य भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस कथित लाठीचार्ज को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मामले की वास्तविक परिस्थितियों और वीडियो की सत्यता को लेकर जांच या स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
किसानों का आरोप- जमीन प्रभावित, मुआवजा नहीं
आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी कृषि भूमि और खेती पर पड़ने वाले प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसानों के अनुसार बिजली परियोजना के लिए लगाए जा रहे खंभों और अन्य निर्माण कार्यों से उनकी जमीन प्रभावित हो रही है, इसलिए उन्हें उचित आर्थिक मुआवजा मिलना चाहिए।
ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रशासन तक पहुंचाई आवाज
अपनी मांगों को लेकर किसानों ने ट्रैक्टर रैली भी निकाली और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा और संतोषजनक मुआवजे का समाधान नहीं निकलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अपनी मांगों को दोहराया है।
आंदोलन स्थल पर पहुंचे राज्य मंत्री कांतिभाई अमृतिया
किसानों के बढ़ते विरोध को देखते हुए गुजरात सरकार के राज्य मंत्री कांतिभाई अमृतिया आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उनके साथ हलवद के विधायक प्रकाशभाई वरमोरा और भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मंत्री ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान का भरोसा दिलाया।
पहले भी हुई थी बैठक, लेकिन नहीं निकला समाधान
राज्य मंत्री कांतिभाई अमृतिया ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पहले कंपनी अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और किसानों के बीच बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी थी। इसी कारण कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। मंत्री ने कहा कि वे लगातार मामले की निगरानी कर रहे हैं और समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।
मुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री तक पहुंचा मामला
मंत्री ने कहा कि किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री के साथ चर्चा की गई है। सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और सकारात्मक समाधान की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया जाएगा।
आगामी बैठक पर टिकी सबकी निगाहें
मोरबी के इस विवाद को लेकर अब प्रशासन, कंपनी प्रतिनिधियों और किसान नेताओं के बीच होने वाली अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कलेक्टर कार्यालय में आयोजित होने वाली बैठक में मुआवजे की राशि, भूमि उपयोग और किसानों की अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक से कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी हुईं तेज
वायरल वीडियो और आंदोलन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासन का पक्ष भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं, जिससे बहस और चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।
किसानों का साफ संदेश- विकास के साथ अधिकार भी जरूरी
आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी जमीन और हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। किसानों की मांग है कि परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों को न्यायसंगत और उचित मुआवजा दिया जाए ताकि विकास और किसानों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके।






