26 साल बाद खुला दर्दनाक राज: भाखड़ा नहर से मिली वैन

Navya Nair
0 सेकंड पहलेYeh kahani kisi thriller movie se bilkul kam nahi.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेYeh case bahut gehri saazish lagti hai.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेIs rahasya ki tah mein kya chhupa hai, sochne par majboor kar diya.
Neel Saxena
21 मिनट पहलेIs rahasya ki tah mein kya chhupa hai, sochne par majboor kar diya.
Anika Rajput
1 घंटे पहलेSach saamne aana chahiye, chahe kitna waqt lage.
पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है। करीब 26 साल पहले एक शादी समारोह से लौटते समय रहस्यमय तरीके से लापता हुए चार लोगों का राज आखिरकार खुल गया। भाखड़ा नहर की गहराइयों से निकाली गई एक जर्जर मारुति ओमनी वैन और उसमें मिले इंसानी अवशेषों ने उन परिवारों को जवाब दे दिया, जो ढाई दशक से अपने अपनों की राह देख रहे थे।
शादी से लौटते वक्त अचानक गायब हो गए थे चार लोग
कोटला गांव के रहने वाले मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और सुरजीत का 8 वर्षीय बेटा कालू 17 अक्टूबर 2000 को एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। चारों लोग तेज राम की मारुति ओमनी वैन में सवार थे, जिसे उन्होंने कुछ समय पहले ही जमीन बेचकर खरीदा था।
रात में घर लौटते समय वे अचानक लापता हो गए। न तो वैन का कोई सुराग मिला और न ही उसमें सवार लोगों का। यह मामला पूरे क्षेत्र में रहस्य बन गया था।
अपनों की तलाश में परिवारों ने बेच दी जमीन और दुकान
लापता लोगों के परिवारों ने उन्हें ढूंढ़ने के लिए हर संभव प्रयास किया। प्रशासनिक खोज अभियान के अलावा निजी गोताखोरों को भी लगाया गया। कई परिवारों ने अपनी जमीन और दुकान तक बेच दी ताकि खोज अभियान जारी रखा जा सके।
लेकिन महीनों तक चली तलाश के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली। समय बीतता गया और उम्मीदें धीरे-धीरे धुंधली पड़ती चली गईं।
दूसरे मामले की तलाश में मिला 26 साल पुराना सुराग
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब स्थानीय गोताखोर कमलप्रीत सैनी एक अन्य शव की तलाश के लिए भाखड़ा नहर में उतरे। करीब 32 फीट गहरी नहर की तलहटी में उन्हें एक जंग लगी और क्षतिग्रस्त मारुति ओमनी वैन दिखाई दी। वैन की हालत इतनी खराब थी कि उसका पिछला हिस्सा और छत लगभग पूरी तरह जंग खाकर नष्ट हो चुके थे। स्थानीय लोगों, ट्रैक्टर, लोहे की चेन और केबल की मदद से कई घंटों की मशक्कत के बाद वाहन को बाहर निकाला गया।
वैन के अंदर मिले कंकाल, यूनिफॉर्म और निजी सामान
जब वैन को बाहर निकालकर जांच की गई तो उसके अंदर इंसानी हड्डियों के अवशेष, एक बच्चे की कमीज, जूते-चप्पल और अन्य निजी सामान बरामद हुए। परिवार के सदस्यों ने कपड़ों और सामान की पहचान करते हुए बताया कि यह उसी बच्चे और परिवार के लोगों की निशानियां हैं जो वर्ष 2000 में लापता हुए थे।
इन अवशेषों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अंधेरे में लौटते समय वैन भाखड़ा नहर में गिर गई थी और सभी सवारों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
26 साल पुराना रहस्य सुलझा, लेकिन ताजा हो गए पुराने जख्म
इस खुलासे ने जहां तीन परिवारों को दशकों पुराने सवालों का जवाब दिया, वहीं उनके पुराने घाव भी फिर से हरे कर दिए। कई परिजनों ने बताया कि उनके माता-पिता अपने बेटे और रिश्तेदारों की वापसी की उम्मीद में दुनिया छोड़ गए। परिवारों का कहना है कि वर्षों तक उन्हें विश्वास था कि शायद एक दिन उनके अपने वापस लौट आएंगे, लेकिन अब मिले कंकालों ने उस उम्मीद को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दी गई अंतिम विदाई
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में वैन से मिले अवशेषों को सावधानीपूर्वक एकत्र किया गया। इसके बाद पीड़ित परिवारों ने रोपड़ के पातालपुरी साहिब गुरुद्वारा में सामूहिक अरदास आयोजित की। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अस्थियों का विसर्जन कर परिजनों को अंतिम विदाई दी गई। 26 वर्षों से अधूरी रह गई विदाई आखिरकार पूरी हुई और एक दर्दनाक अध्याय का अंत हो गया।
घटना ने उठाए कई सवाल
यह घटना न केवल एक पुराने रहस्य के खुलासे की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कई बार हादसे वर्षों तक अनसुलझे रह जाते हैं। आधुनिक तकनीक और स्थानीय लोगों की सतर्कता ने आखिरकार उस सच को सामने ला दिया, जिसकी तलाश तीन परिवार पिछले 26 वर्षों से कर रहे थे।




