BJP Protest in Varanasi: वाराणसी एमएलसी चुनाव में बीजेपी का धरना, पर्यवेक्षक को लेकर भ्रम

वाराणसी एमएलसी चुनाव में बीजेपी का धरना, पर्यवेक्षक को लेकर भ्रम
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Ada khan

Ada khan

0 सेकंड पहले

Nishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.

Myra Dubey

Myra Dubey

0 सेकंड पहले

Neta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!

Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

0 सेकंड पहले

Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

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वाराणसी एमएलसी चुनाव की मतगणना पर विवाद
उत्तर प्रदेश के वाराणसी खंड स्नातक विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गिनती की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उस समय की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा प्रथम वरीयता के आठवें चक्र की मतगणना के बाद बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह से 16,261 वोटों से आगे चल रहे थे। बीजेपी ने पांचवें चक्र की मतगणना दोबारा कराने की मांग की थी।

 

पांचवें चक्र की गिनती पर उठाए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार रात बीजेपी के नेता, प्रत्याशी, प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक, मेयर और पार्टी कार्यकर्ता मतगणना स्थल पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पांचवें चक्र की मतगणना के दौरान बीजेपी के एजेंट मौजूद नहीं थे और गिनती सपा के एजेंट की मौजूदगी में हुई। इसी आधार पर उन्होंने दोबारा मतगणना कराने की मांग उठाई और निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।

 

पांच घंटे चला धरना, पर्यवेक्षक के खिलाफ नारेबाजी
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रांजल यादव के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रांजल यादव को अखिलेश यादव का रिश्तेदार बताते हुए उन्हें पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग भी की। रिपोर्ट के अनुसार, धरना करीब पांच घंटे तक चला और रात नौ बजे समाप्त हुआ।

 

पर्यवेक्षक को लेकर सामने आया भ्रम
इस मामले में एक अहम सवाल यह उठा कि वाराणसी खंड स्नातक सीट की मतगणना के पर्यवेक्षक कौन थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को इस पद पर नियुक्त अधिकारी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। खबर के मुताबिक, प्रांजल यादव शिक्षक खंड के पर्यवेक्षक थे, जबकि स्नातक खंड के लिए जीसी प्रियदर्शी पर्यवेक्षक बताए गए। इस अंतर को लेकर प्रदर्शन और प्रत्याशी के बयानों पर सवाल उठे।

दोबारा मतगणना की मांग पर कायम रहे बीजेपी नेता
पर्यवेक्षक को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद बीजेपी प्रत्याशी और नेताओं ने पांचवें चक्र की मतगणना दोबारा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि संबंधित चक्र में पार्टी के एजेंटों की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। धरना समाप्त होने के संबंध में रिपोर्ट में पांचवें चक्र की गिनती दोबारा कराने के आश्वासन का उल्लेख किया गया, हालांकि अंतिम आधिकारिक निर्णय की पुष्टि संबंधित निर्वाचन अधिकारी के बयान से की जानी चाहिए।

 

आठवें चक्र तक आशुतोष सिन्हा को मिले 47,450 वोट
उस समय उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रथम वरीयता के आठवें चक्र की मतगणना के बाद सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 47,450 वोट मिले थे। बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह के खाते में 31,189 वोट दर्ज किए गए थे। इस तरह आशुतोष सिन्हा 16,261 वोटों से आगे चल रहे थे। ये आंकड़े मतगणना के उस चरण की स्थिति दर्शाते हैं, न कि अंतिम परिणाम।

 

मतगणना की पारदर्शिता पर जोर
चुनाव में मतगणना की प्रक्रिया और एजेंटों की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों का समाधान निर्वाचन अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है। किसी भी प्रत्याशी की आपत्ति पर निर्णय संबंधित चुनाव नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार किया जाता है।

 

नोट
यह खबर मतगणना के दौरान उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। वोटों की संख्या और पर्यवेक्षक की नियुक्ति से जुड़े विवरणों को अंतिम रूप से प्रकाशित करने से पहले निर्वाचन आयोग या संबंधित निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान करना उचित होगा।

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Myra Dubey

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Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

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