US Iran Deal Shift: ईरान से समझौते के लिए अमेरिका ने बदली परमाणु संवर्धन की शर्त

Aryan Malhotra
1 घंटे पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
Riya Jain
2 घंटे पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Kabir Shukla
2 घंटे पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
Nisha Shah
4 घंटे पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Kabir Shukla
5 घंटे पहलेIs khabar ka asar kai deshon par padega.
Pihu Agarwal
6 घंटे पहलेInternational politics bahut tezi se badal rahi hai.
Arjun Singh
7 घंटे पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
Ayaan Khan
8 घंटे पहलेVishwa shanti ke liye yeh situation concerning hai.
ईरान से समझौते के लिए अमेरिका ने बदली बड़ी शर्त
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच अब बातचीत की कोशिशें भी तेज होती दिखाई दे रही हैं। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और खासकर यूरेनियम संवर्धन सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका पहले ईरान से परमाणु संवर्धन पूरी तरह रोकने की मांग कर रहा था, लेकिन अब उसका रुख कुछ नरम होता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अब संवर्धन क्षमता को पूरी तरह खत्म करने के बजाय इसे एक निर्धारित सीमा तक कम करने पर जोर दे रहा है।
परमाणु संवर्धन बना सबसे बड़ा मुद्दा
यूरेनियम को एक विशेष प्रक्रिया के जरिए अधिक शुद्ध बनाने को संवर्धन कहा जाता है। परमाणु ऊर्जा के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन संवर्धन का स्तर बढ़ने पर परमाणु हथियारों की संभावित क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ती है। अमेरिका ईरान के 60 फीसदी तक संवर्धित ईंधन को लेकर सवाल उठा रहा है और उसका कहना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं रखता, तो उसे इतनी ऊंची क्षमता वाला संवर्धित ईंधन रखने की जरूरत क्यों है।
अमेरिका को सिर्फ वादे नहीं, ठोस कदम चाहिए
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि केवल भविष्य में परमाणु संवर्धन कम करने का भरोसा अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं होगा। वाशिंगटन ईरान की ओर से जमीन पर वास्तविक और ठोस कदम चाहता है। अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान से स्पष्ट रियायत की मांग कर रहा है। वेंस ने यह भी कहा कि ईरान के निर्णय लेने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है और अमेरिका को यह पता नहीं है कि तेहरान में अंतिम निर्णय कौन लेता है।
युद्ध के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य भी अहम
ईरान-अमेरिका बातचीत का असर सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी प्रभावित किया है। बातचीत में युद्ध खत्म करने के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच युद्ध खत्म करने और होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है।
ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और सैन्य कार्रवाई बढ़ने की चेतावनी भी दी है। ऐसे में तेहरान पर सैन्य और आर्थिक दोनों तरह का दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर, परमाणु संवर्धन को लेकर अमेरिका के रुख में बदलाव संभावित समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने और व्यापक समझौते तक पहुंचने के लिए अभी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।








