CBSE Three Language Policy Update: CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर SC की अहम टिप्पणी

Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
सीबीएसई की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी सामने आई है। 17 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने CBSE से कक्षा 6 के मौजूदा छात्रों के लिए नीति को तुरंत अनिवार्य करने के बजाय 2027 के शैक्षणिक सत्र से लागू करने पर विचार करने को कहा। अदालत ने कहा कि बच्चों और परिवारों को बदलाव के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। कोर्ट की यह बात नीति की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि मौजूदा छात्रों को राहत देने के संबंध में सुझाव है। CBSE की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि बोर्ड इस सुझाव पर विचार करेगा और नई जानकारी कोर्ट के सामने रखेगा।
बच्चों को दिया जाए ब्रीदिंग स्पेस
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर अचानक तीसरी भाषा का अनिवार्य प्रावधान लागू किए जाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की ओर से कहा गया कि बच्चों और उनके परिवारों को नई व्यवस्था के अनुसार खुद को तैयार करने के लिए कुछ समय मिलना चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नीति को अगले शैक्षणिक सत्र तक टालने का सुझाव दिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जो मौजूदा कक्षा 6 के छात्र इस साल तीन भाषाएं पढ़ना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी जा सकती है। इस सुझाव पर अंतिम निर्णय CBSE को अपने अगले रुख के साथ स्पष्ट करना है।
कक्षा 9 में तीन भाषाओं की व्यवस्था
CBSE के संशोधित भाषा ढांचे के तहत कक्षा 9 के लिए 2026-27 शैक्षणिक सत्र से तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। इसमें तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर तभी चुना जा सकता है जब दो भारतीय भाषाओं का चयन किया गया हो। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा यानी NCF-SE 2023 के अनुरूप भाषा शिक्षा को लागू करने की दिशा में किया गया है। CBSE के दस्तावेजों में R1, R2 और R3 के रूप में तीन-भाषा ढांचे को कक्षा 9-10 के स्तर पर लागू करने की रूपरेखा का उल्लेख है।
दो भारतीय भाषाएं रखना जरूरी
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि छात्रों को तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना होगा। इसका मतलब है कि छात्र अपनी भाषा संबंधी पसंद के अनुसार उपलब्ध भारतीय भाषाओं में से विकल्प चुन सकेंगे, जबकि विदेशी भाषाओं के चयन को अलग नियमों के तहत रखा गया है। CBSE के नए ढांचे का उद्देश्य स्कूली शिक्षा में बहुभाषिकता को बढ़ावा देना है। हालांकि, अलग-अलग स्कूलों में उपलब्ध भाषाओं और शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। इसी वजह से नीति के लागू होने के तरीके और समय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
स्कूलों में संसाधनों को लेकर भी सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से भाषा शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों में संसाधनों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। सवाल यह है कि सभी CBSE स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षक और जरूरी शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं। CBSE ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को एकमुश्त छूट देने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे भाषा सीखने की क्रमिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और आगे भी ऐसी मांगें उठ सकती हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा। अब CBSE को इस मामले में अपना संशोधित रुख अदालत के सामने रखना है।
2027 को लेकर अब CBSE के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के लिए तीन-भाषा नीति को 2027 से अनिवार्य करने पर विचार करने का सुझाव दिया है, लेकिन इसे अभी अंतिम आदेश या स्थायी बदलाव के रूप में नहीं देखा जा सकता। CBSE को अदालत के सुझाव पर विचार कर आगे की स्थिति स्पष्ट करनी है। वहीं कक्षा 9 के लिए 2026-27 से तीन भाषाओं की व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया जारी है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई में CBSE का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों की नजर अब इस बात पर है कि कक्षा 6 के मौजूदा बैच के लिए बोर्ड क्या अंतिम फैसला सामने रखता है।







