Over 30 tribal children die in Balaghat: बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत

बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत
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Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

9 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

10 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

11 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

13 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Vihaan Patel

Vihaan Patel

14 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

16 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ने के बाद अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है।


कई बीमारियां एक साथ बनी चुनौती
स्वास्थ्य जांच में बच्चों में खसरा, मलेरिया, दस्त, बुखार, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां सामने आई हैं। इसके साथ ही कुपोषण और एनीमिया ने बच्चों की स्थिति को और गंभीर बनाया है। सरकारी जांच में अब तक किसी एक बीमारी या एक ही पैथोजन को सभी मौतों का कारण नहीं माना गया है। विशेषज्ञों की जांच में कई चिकित्सकीय कारण सामने आने की बात कही गई है।


अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चे भर्ती
स्वास्थ्य सर्वे के दौरान प्रभावित गांवों में हजारों लोगों की स्क्रीनिंग की गई। चार गांवों में 6,342 लोगों की जांच में 1,149 बीमार मरीज मिले, जिनमें 486 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से अधिकांश मरीज उपचार के बाद ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि कुछ का इलाज जारी बताया गया है। इससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

 

कुपोषण ने बढ़ाई बच्चों की संवेदनशीलता
बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर और मध्यम स्तर के कुपोषण के मामले सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े कुपोषण को किसी व्यक्तिगत मौत का सीधा कारण साबित नहीं करते, लेकिन यह जरूर बताते हैं कि प्रभावित क्षेत्र के बच्चे संक्रमण और दूसरी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।


हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता, पोषण और इलाज की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य निगरानी, जांच और उपचार संबंधी कदम तेज किए गए हैं।


जांच और स्वास्थ्य अभियान जारी
प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सर्वे, मरीजों की पहचान, उपचार और बीमारी की निगरानी का काम जारी है। स्थानीय स्तर पर टीकाकरण, दवाओं के वितरण, मच्छर नियंत्रण और पेयजल से जुड़े उपाय भी किए जा रहे हैं। फिलहाल बच्चों की मौतों के पीछे किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं माना गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही मौतों के वास्तविक कारणों की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

 

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Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

9 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

10 घंटे पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

11 घंटे पहले

Is decision ka poore desh par seedha asar padega.

Reyansh Joshi

Reyansh Joshi

13 घंटे पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Vihaan Patel

Vihaan Patel

14 घंटे पहले

Desh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.

Aryan Malhotra

Aryan Malhotra

16 घंटे पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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