Greater Noida Bus Fire: ग्रेटर नोएडा में स्लीपर बस बनी आग का गोला

Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Myra Dubey
58 मिनट पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर की देर रात एक स्लीपर बस में अचानक भीषण आग लग गई। हादसा जेवर थाना क्षेत्र में दयानतपुर गांव के पास करीब 33 किलोमीटर माइलस्टोन के आसपास हुआ। आग इतनी तेजी से फैली कि बस में सवार कई यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। पुलिस और राहत-बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर यात्रियों को बाहर निकालने और आग पर काबू पाने की कोशिश की। इस दर्दनाक हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली से महोबा जा रही थी बस
हादसे का शिकार हुई निजी स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे। आग लगने के बाद बस में अफरा-तफरी मच गई और कई यात्रियों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई। कुछ यात्रियों को आग और धुएं के कारण गंभीर चोटें आईं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद बस पूरी तरह आग की चपेट में आ गई और मौके पर काफी देर तक बचाव अभियान चलाया गया। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू की गई है ताकि उनके परिवारों को सूचना दी जा सके।
आग से पहले यात्रियों ने जताई थी चिंता
हादसे के बाद दर्ज FIR में यात्री सुनील कुमार की शिकायत का उल्लेख है। शिकायत के अनुसार, आग लगने से पहले बस में जलने जैसी गंध महसूस हुई थी और यात्रियों ने ड्राइवर तथा कंडक्टर से बस रोकने के लिए कहा था। FIR में आरोप लगाया गया है कि यात्रियों की चेतावनी के बावजूद बस को तत्काल नहीं रोका गया और बाद में धुआं तथा आग तेजी से फैल गई। इसके बाद यात्रियों ने बस से निकलने की कोशिश की और कुछ लोग खिड़कियों से बाहर कूद गए। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है, इसलिए इन्हें फिलहाल FIR में दर्ज शिकायत के तौर पर ही देखा जा रहा है।
ड्राइवर और कंडक्टर हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने बस के संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार ड्राइवर और कंडक्टर को पुलिस ने हिरासत में लिया है तथा उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आग किस वजह से लगी और आग लगने के बाद बस को रोकने तथा यात्रियों को सुरक्षित निकालने में क्या कार्रवाई की गई। बस के संचालन, सुरक्षा मानकों और पहले से मौजूद दस्तावेजों तथा चालानों से जुड़ी जानकारियां भी जांच का हिस्सा हैं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के लिए जिम्मेदारी और आग की वास्तविक वजह को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख
ग्रेटर नोएडा बस हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। घायलों के लिए भी 50 हजार रुपये की सहायता राशि घोषित की गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
हादसे की वजह की जांच जारी
पुलिस और प्रशासन की जांच में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्लीपर बस में आग किस कारण लगी और आग फैलने से पहले यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं मिल पाया। फिलहाल आग की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। पुलिस FIR में दर्ज आरोपों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, बस की तकनीकी स्थिति और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। इस हादसे ने एक्सप्रेसवे पर चलने वाली स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की आपातकालीन निकासी की तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इन सवालों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।








