47 साल बाद मिला हक: 82 वर्षीय कलावती देवी को पहली बार मिली पारिवारिक पेंशन

Diya Gupta
19 घंटे पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Navya Nair
21 घंटे पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Dhruv Bhatt
21 घंटे पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Dhruv Bhatt
23 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Yash Kulkarni
1 दिन पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Pihu Agarwal
1 दिन पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
सरकारी व्यवस्था की सुस्ती और संवेदनहीनता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। उत्तर प्रदेश के जौनपुर की 82 वर्षीय कलावती देवी को अपने पति की पारिवारिक पेंशन पाने के लिए पूरे 47 साल तक संघर्ष करना पड़ा। जीवन के अंतिम पड़ाव पर गंभीर बीमारियों से जूझ रही इस बुजुर्ग महिला को आखिरकार हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उनका हक मिल सका।
पति की मौत के बाद शुरू हुआ संघर्ष
जौनपुर के सल्तनत बहादुर इंटर कॉलेज, बदलापुर में सहायक अध्यापक रहे दिवंगत टीटी यादव ने 15 अक्टूबर 1971 को अपनी सेवा शुरू की थी। लेकिन 26 नवंबर 1979 को सेवाकाल के दौरान ही उनका असामयिक निधन हो गया। नियमों के अनुसार उनकी पत्नी कलावती देवी को अगले ही दिन से 217 रुपये प्रतिमाह की पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
जानकारी के अभाव में वर्षों तक नहीं कर सकीं आवेदन
ग्रामीण पृष्ठभूमि और सरकारी नियमों की जानकारी न होने के कारण कलावती देवी वर्षों तक अपने अधिकार से अनजान रहीं। गरीबी, अकेलापन और संसाधनों की कमी ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया। समय बीतता गया, लेकिन पेंशन की फाइल कभी आगे नहीं बढ़ सकी।
2024 में खुला पेंशन का रास्ता
वर्ष 2024 में कलावती देवी के दामाद दयाशंकर यादव को एक शुभचिंतक के माध्यम से इस अधिकार की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार ने डीआईओएस जौनपुर कार्यालय के चक्कर लगाने शुरू किए। लेकिन विभाग ने साढ़े चार दशक पुराने दस्तावेज उपलब्ध न होने का हवाला देकर मामला टालना शुरू कर दिया।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, विभाग को लगी फटकार
जब हर दरवाजा बंद होता दिखा तो कलावती देवी ने हाईकोर्ट का सहारा लिया। करीब दो वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल पेंशन व ग्रेच्युटी जारी करने का आदेश दिया।
कोर्ट के सख्त रुख के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक और उप शिक्षा निदेशक वाराणसी दिनेश सिंह ने 20 मई 2026 को पहली पेंशन राशि जारी करने की फाइल को मंजूरी दे दी। इसके बाद जौनपुर कोषाधिकारी को भुगतान का अंतिम आदेश भेजा गया।
बीमारी और बेबसी के बीच मिली राहत
कलावती देवी का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। एक जनवरी 1944 को जन्मीं कलावती अब गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं। उनकी इकलौती बेटी लालती देवी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है।
नाती अनिल यादव ने सुनाई दर्दभरी कहानी
कलावती देवी के नाती अनिल यादव, जो पेशे से वाहन चालक हैं, ने नम आंखों से बताया कि उनकी नानी लंबे समय तक अपने भाई के घर में रहीं, लेकिन बीमारी बढ़ने के बाद उन्हें वहां से भी निकाल दिया गया। परिवार बेहद कठिन हालात में जीवन गुजार रहा था।
अनिल का कहना है कि अब यह पेंशन उनकी नानी के इलाज और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का सहारा बनेगी।
सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक बुजुर्ग महिला को अपने वैधानिक अधिकार के लिए 47 साल तक संघर्ष क्यों करना पड़ा? यदि हाईकोर्ट हस्तक्षेप न करता, तो शायद कलावती देवी को उनका हक कभी नहीं मिल पाता।
सोशल मीडिया पर लोग बोले- यह सिर्फ एक महिला की नहीं, सिस्टम की कहानी
कलावती देवी की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग भावुक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे सरकारी लापरवाही का सबसे दर्दनाक उदाहरण बताया है।



