हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल ढहा: 6 मजदूरों की मौत
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेYeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.
Taushif Shekh
21 मिनट पहलेHum is cause ke saath hain!
Nidhi kumari
1 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Sonu rai
2 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल के ढहने से बड़ा हादसा हो गया। देर रात आए तेज तूफान और मूसलाधार बारिश के दौरान पुल का एक हिस्सा अचानक गिर गया, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में छह मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ अन्य मजदूर घायल हुए। घटना के बाद SDRF, प्रशासन और पुलिस की टीमों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
हादसे से पहले का वीडियो आया सामने
हादसे के तीसरे दिन बांदा जिले के चिल्ला गांव निवासी मजदूर कुलदीप का एक वीडियो सामने आया है, जिसे दुर्घटना से कुछ समय पहले रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में तेज हवाओं, बारिश और खराब मौसम के बीच पुल के ऊपरी हिस्से पर बैठे मजदूरों की भयावह स्थिति दिखाई दे रही है। कुलदीप वीडियो में हालात की गंभीरता बताते हुए मदद की गुहार लगाते नजर आते हैं।
बताया जा रहा है कि कुलदीप ने 29 मई की रात करीब 12:05 बजे अपने साथी को तीन वीडियो भेजे थे। इनमें से सबसे लंबा वीडियो 1 मिनट 19 सेकंड का है, जिसमें तेज तूफान और निर्माण स्थल की खतरनाक स्थिति साफ दिखाई देती है।
मौसम चेतावनी के बावजूद जारी रहा काम?
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मौसम विभाग द्वारा खराब मौसम की चेतावनी जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया। मजदूरों को पुल पर केबल कसने और अन्य तकनीकी कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज आंधी के दौरान मजदूर पुल पर ही मौजूद थे। इसी बीच निर्माणाधीन संरचना का हिस्सा असंतुलित होकर गिर गया और भारी स्लैब नीचे आ गिरा।
प्रारंभिक जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें
प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि हादसे के समय क्षेत्र में 110 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक रफ्तार से आंधी चली होगी। अधिकारियों के मुताबिक, 21 सेगमेंट बॉक्स में से 15 बॉक्स गिर गए थे। प्रत्येक बॉक्स का वजन लगभग 150 टन था, जिससे हजारों टन का दबाव एक ही पियर पर आ गया और पूरी संरचना ध्वस्त हो गई। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अब तक पुल की डिजाइन में किसी तकनीकी खामी की पुष्टि नहीं हुई है। पुल का डिजाइन विशेषज्ञ संस्थानों से स्वीकृत होने के बाद ही निर्माण शुरू किया गया था।
अधिकारियों पर कार्रवाई, कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज
हादसे के बाद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया है। वहीं परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। राज्य सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर ने निर्माण कार्य कर रही कंपनी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। जांच एजेंसियां निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और कार्य प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर रही हैं।
90 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
बेतवा नदी पर बन रहा यह दो लेन का पुल लगभग 700 मीटर लंबा है और इसकी लागत करीब 90 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मार्च 2024 में शुरू हुई इस परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना था। हादसे के बाद अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है। निर्माण सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।




