एथेनॉल मात्रा बताने की याचिका खारिज: याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट जाने को कहा

Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Myra Dubey
6 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Anil Sen
6 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ayaan Khan
6 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Aryan Malhotra
10 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
E20 पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा की अनिवार्य जानकारी देने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में देशभर के पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को यह स्पष्ट रूप से बताने की मांग की गई थी कि पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है। याचिकाकर्ता ने पेट्रोल पंप के नोजल और ग्राहक को दिए जाने वाले बिल या रसीद पर इथेनॉल की मात्रा का उल्लेख अनिवार्य करने की मांग की थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित सक्षम प्राधिकारी या हाई कोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी।
क्या थी याचिकाकर्ता की मांग?
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में उपभोक्ताओं को E20 पेट्रोल की संरचना की स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि पेट्रोल खरीदने वाले ग्राहकों को यह पता होना चाहिए कि उन्हें दिए जा रहे ईंधन में इथेनॉल की मात्रा कितनी है। इसके लिए प्रत्येक पेट्रोल पंप के डिस्पेंसिंग नोजल पर ब्लेंडिंग प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखने की मांग की गई थी। इसके अलावा पेट्रोल खरीदने के बाद मिलने वाले बिल या रसीद पर भी इथेनॉल की मात्रा दर्ज करने का सुझाव दिया गया था। याचिका में वाहनों की अनुकूलता से जुड़ा एक डेटाबेस तैयार करने की मांग भी रखी गई थी, ताकि वाहन मालिक अपने वाहन के लिए ईंधन की उपयुक्तता की जानकारी हासिल कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर दखल से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी विकल्प अपनाने की छूट दी। अदालत ने संकेत दिया कि इस प्रकार की मांगों को पहले संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उठाया जा सकता है। इसके अलावा याचिकाकर्ता हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकता है। इस फैसले का मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पेट्रोल पंपों पर E20 में इथेनॉल की मात्रा अलग से प्रदर्शित करने का कोई नया निर्देश जारी नहीं किया है। अब इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई संबंधित प्राधिकरण या हाई कोर्ट के स्तर पर हो सकती है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से भी E20 नीति का पक्ष रखा गया।
सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का किया बचाव
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में E20 यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण की नीति का बचाव किया गया। सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय लाभ हासिल करना है। इसके साथ ही इथेनॉल उत्पादन से किसानों और कृषि क्षेत्र को भी आर्थिक लाभ मिलने की बात सरकार की ओर से कही जाती रही है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लेकर पहले भी न्यायिक स्तर पर चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। ऐसे में केंद्र ने E20 नीति को व्यापक राष्ट्रीय हित से जुड़ी नीति के रूप में प्रस्तुत किया।
पुरानी गाड़ियों को लेकर भी उठे सवाल
E20 पेट्रोल को लेकर देश में पुरानी गाड़ियों की अनुकूलता का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल को लेकर कुछ वाहन मालिकों में इंजन, फ्यूल सिस्टम और माइलेज से संबंधित चिंताएं सामने आती रही हैं। इसी वजह से याचिका में वाहन मालिकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनकी गाड़ी किस प्रकार के ईंधन के लिए उपयुक्त है। इसके लिए वाहन अनुकूलता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने और उपभोक्ताओं को स्पष्ट लेबलिंग उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर फिलहाल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
अब हाई कोर्ट या सक्षम प्राधिकरण का रुख कर सकेंगे याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद E20 पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा की अनिवार्य जानकारी देने का मुद्दा अब संबंधित सक्षम प्राधिकरण या हाई कोर्ट के सामने उठाया जा सकता है। अदालत ने याचिकाकर्ता के लिए इन विकल्पों को खुला रखा है। फिलहाल पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन की बिक्री और इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई नया निर्देश नहीं दिया गया है। E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ता जागरूकता, वाहन अनुकूलता और ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग जैसे मुद्दे आगे भी चर्चा में बने रहने की संभावना है। इस मामले में अब अगला कदम याचिकाकर्ता की ओर से संबंधित प्राधिकरण या हाई कोर्ट का रुख किए जाने पर निर्भर करेगा।






