4 हजार तक पहुंची किसानों की संख्या: चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसान डटे

चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसान डटे
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Riya Jain

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0 सेकंड पहले

Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

0 सेकंड पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

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संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले पंजाब के किसान संगठनों का सात दिवसीय पक्का मोर्चा चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर 5 सितंबर को पांचवें दिन भी जारी है। किसानों ने यह आंदोलन 1 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक के लिए शुरू किया है और बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं। यह प्रदर्शन मोहाली और चंडीगढ़ को जोड़ने वाले मार्ग पर हो रहा है, जिसके चलते प्रशासन को यातायात और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने पड़े हैं। Hindustan Times के अनुसार शुक्रवार तक प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़कर करीब 4,000 हो गई थी।


MSP की कानूनी गारंटी प्रमुख मांग
किसानों के आंदोलन की प्रमुख मांग सभी कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी है। SKM की मांग है कि MSP को कानूनी रूप से लागू किया जाए और किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित मूल्य मिले। किसानों ने MSP को स्वामीनाथन आयोग के C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर लागू करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सभी फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस मुद्दे को आंदोलन के प्रमुख कृषि संबंधी मुद्दों में शामिल किया गया है।


कर्जमाफी और गन्ने के दाम की मांग
किसान संगठनों ने किसानों और कृषि मजदूरों के पूर्ण कर्जमाफी की मांग भी उठाई है। इसके अलावा गन्ना उत्पादक किसानों के लिए गन्ने का भाव बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की गई है। किसानों ने गन्ने के बकाया भुगतान को लेकर भी समाधान की मांग रखी है। SKM के मुताबिक कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव के बीच किसानों तथा ग्रामीण श्रमिकों को राहत देने के लिए कर्जमाफी और बेहतर आय जरूरी है। आंदोलन में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी शामिल है।

 

अमेरिका-यूरोप के व्यापार समझौतों का विरोध
प्रदर्शनकारी किसान अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों का भी विरोध कर रहे हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि ऐसे व्यापार समझौतों से कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे घरेलू किसानों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही SKM ने Electricity Amendment Act और Seed Bill सहित कुछ कृषि एवं ग्रामीण नीतियों का विरोध किया है। किसानों की मांग है कि ऐसी नीतियां लागू करने से पहले उनके संभावित प्रभावों पर व्यापक विचार किया जाए। आंदोलन के एजेंडे में Dam Safety Act और Disaster Management Act से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।


पंजाब के पानी और BBMB का मुद्दा भी शामिल
किसानों के आंदोलन में पंजाब के नदी जल से जुड़े पुराने समझौतों को रद्द करने और राज्य के जल अधिकारों की रक्षा की मांग भी प्रमुख है। SKM ने पंजाब के नदी जल बंटवारे से जुड़े पुराने समझौतों को खत्म करने तथा इस मुद्दे पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इसके अलावा किसानों ने Bhakra Beas Management Board यानी BBMB में पंजाब के प्रतिनिधित्व को बहाल करने की मांग भी रखी है। किसानों का कहना है कि पंजाब के पानी से जुड़े फैसलों में राज्य के हितों और अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


प्रदर्शन से यातायात प्रभावित, प्रशासन ने किए इंतजाम
चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों की बढ़ती संख्या का असर आसपास के यातायात पर भी पड़ा है। Hindustan Times के अनुसार किसानों के मार्च के दौरान यात्रियों को IISER Chowk से Jagatpura की ओर वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। वहीं प्रशासन और पुलिस ने यातायात को नियंत्रित करने के लिए डायवर्जन और सुरक्षा व्यवस्था की है। The Tribune की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन स्थल पर पहले से ही बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंच चुकी हैं और पुलिस किसानों के नेताओं के साथ समन्वय कर रही है। फिलहाल यह सात दिवसीय पक्का मोर्चा 7 सितंबर तक निर्धारित है और इसके बाद किसान संगठन अपनी आगे की रणनीति पर फैसला कर सकते हैं।

 

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Har Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.

Dhruv Bhatt

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

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