Hidden Inflammation May Damage the Heart: छिपी सूजन से दिल को नुकसान, लक्षणों से वर्षों पहले बढ़ सकता है खतरा

Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
छिपी सूजन का असर
शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली हल्की सूजन दिल की सेहत को धीरे-धीरे प्रभावित कर सकती है। Imperial College London और MRC Laboratory of Medical Sciences के शोधकर्ताओं की नई स्टडी में संकेत मिले हैं कि लगातार सूजन से जुड़े बदलाव हृदय संबंधी लक्षण दिखाई देने से कई साल पहले भी नजर आ सकते हैं।
दिल की बनावट में बदलाव
करीब 4.8 लाख UK Biobank प्रतिभागियों के आंकड़ों के विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने GlycA नामक रक्त मार्कर का इस्तेमाल किया। अधिक सूजन वाले लोगों में दिल की दीवारों के मोटे होने, हृदय कक्षों के छोटे होने और दिल के भरने की क्षमता में बदलाव जैसे संकेत पाए गए। शोधकर्ताओं के अनुसार ये बदलाव समय के साथ हृदय की कार्यक्षमता पर असर डाल सकते हैं और आगे चलकर हार्ट फेलियर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा
स्टडी में सूजन के सबसे ऊंचे स्तर वाले 20 प्रतिशत लोगों में सबसे निचले 20 प्रतिशत समूह की तुलना में हार्ट अटैक और स्ट्रोक सहित प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 43 प्रतिशत अधिक पाया गया। यह संबंध उन प्रतिभागियों में भी देखा गया, जिनमें पहले से हृदय रोग का कोई इतिहास नहीं था।
तनाव और जीवनशैली का संबंध
शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक सूजन का संबंध मनोवैज्ञानिक तनाव, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और कुछ स्थापित जोखिम कारकों जैसे धूम्रपान तथा शरीर में अधिक वसा से भी था। अध्ययन इन कारकों और सूजन के बीच संबंध दिखाता है, हालांकि इससे किसी एक कारण को हर व्यक्ति में सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
जीवनशैली पर ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार हृदय स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान से बचना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित खान-पान रखना और पर्याप्त नींद जैसी स्वस्थ आदतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी भी हृदय रोग में लंबे समय तक रहने वाली सूजन की भूमिका को महत्वपूर्ण मानता है।
स्टडी का बड़ा संकेत
नई रिसर्च इस ओर ध्यान दिलाती है कि हृदय रोग का जोखिम केवल लक्षण सामने आने के बाद ही नहीं बनता। शरीर में लंबे समय से मौजूद सूजन और उससे जुड़े हृदय के संरचनात्मक बदलाव भविष्य के कार्डियोवैस्कुलर जोखिम का संकेत दे सकते हैं। हालांकि स्टडी मुख्य रूप से संबंधों को दर्शाती है और हर व्यक्ति के लिए यह निष्कर्ष सीधे बीमारी की भविष्यवाणी नहीं करता।






