Pitru Paksha Begins: पूर्णिमा श्राद्ध पर जलाएं 16 दीपक, जानें धार्मिक मान्यता

पूर्णिमा श्राद्ध पर जलाएं 16 दीपक, जानें धार्मिक मान्यता
प्रतिक्रियाएँ
Sonu rai

Sonu rai

1 घंटे पहले

Karma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.

Anika Rajput

Anika Rajput

5 घंटे पहले

Aaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

5 घंटे पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

6 घंटे पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Ravi sinha

Ravi sinha

8 घंटे पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

9 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Aditya Verma

Aditya Verma

9 घंटे पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

11 घंटे पहले

Dharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.

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पूर्णिमा श्राद्ध से पितृपक्ष का क्रम
26 सितंबर 2026 को भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर पूर्णिमा श्राद्ध मनाया जा रहा है। इसके अगले दिन 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृपक्ष की श्राद्ध तिथियों का क्रम शुरू होगा। धार्मिक परंपराओं में इस अवधि को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्रद्धा से जुड़े कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

पूर्णिमा श्राद्ध पर 16 दीपक जलाने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा श्राद्ध की शाम पितरों के निमित्त 16 दीपक जलाने की परंपरा बताई जाती है। 16 दीपकों को पितृपक्ष की श्राद्ध तिथियों और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से जोड़कर देखा जाता है। यदि 16 दीपक जलाना संभव न हो तो श्रद्धा और सुविधा के अनुसार दीपदान करने की मान्यता भी बताई गई है।

 

दक्षिण दिशा में दीपक रखने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित दिशा माना जाता है। इसलिए कई परंपराओं में पितरों के निमित्त दीपक दक्षिण दिशा में रखने की बात कही गई है। तर्पण से जुड़ी धार्मिक विधियों में भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करने का उल्लेख मिलता है।

 

पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं। जिस तिथि पर किसी पूर्वज का निधन हुआ हो, उस तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा कई हिंदू परिवारों में प्रचलित है।

 

पितृपक्ष का धार्मिक महत्व
पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान श्रद्धा से किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे कर्मों के माध्यम से पितरों की शांति और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ये बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनकी वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक नहीं है।

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Sonu rai

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1 घंटे पहले

Karma ka chakkar aisa hi hota hai, koi nahi bacha sakta.

Anika Rajput

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5 घंटे पहले

Aaj ka din bahut mahatvapurna raha jyotish ke hisaab se.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

5 घंटे पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Saanvi Pandey

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6 घंटे पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Ravi sinha

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8 घंटे पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Aarohi Chaudhary

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9 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Aditya Verma

Aditya Verma

9 घंटे पहले

Yeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!

Ritika Ghosh

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11 घंटे पहले

Dharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.

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