Bhadrapada Purnima 2026: भाद्रपद पूर्णिमा पर ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा

Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Taushif Shekh
0 सेकंड पहलेKundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेIshwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.
Priya Iyer
49 मिनट पहलेYeh toh planets ki chaal ka hi asar hai!
Vaishali shinde
1 घंटे पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Krishna Yadav
2 घंटे पहलेGraha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.
भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि
भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे शुरू होकर 26 सितंबर की रात 10:18 बजे तक रहेगी। अलग-अलग स्थानों के अनुसार मुहूर्त और चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
शुभ मुहूर्त
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:12 बजे से 3 बजे तक है।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल पर चौकी रखकर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है और मां लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर चंदन, सिंदूर, फूल, दीपक, धूप और भोग अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद कथा और आरती की जाती है।
चंद्रमा को अर्घ्य
पूर्णिमा व्रत की परंपरा में शाम को चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है। चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ भारतीय शहरों के पंचांग में 26 सितंबर को चंद्रोदय करीब 6 बजे शाम के आसपास बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं का आधार
भाद्रपद पूर्णिमा को हिंदू परंपरा में व्रत, पूजा, दान और भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पूजा-विधि और मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।








