ईशान किशन के चोटिल होने से बदली कप्तानी: वैभव ने संभाली कप्तानी

Neha Tripathi
2 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Vaishali shinde
2 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Nisha Shah
2 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Taushif Shekh
7 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Anil Sen
8 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Taushif Shekh
8 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Payal jadon
8 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Ravi sinha
10 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Diya Gupta
11 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Yash Kulkarni
12 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन को उस समय बड़ा झटका लगा जब नियमित कप्तान ईशान किशन चोटिल हो गए। सेंट्रल जोन के खिलाफ मुकाबले में विकेटकीपिंग करते समय उनके हाथ में गेंद लगी। चोट के बाद ईशान किशन को मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी कुमार कुशाग्र ने संभाली। वहीं टीम की कप्तानी 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को सौंपी गई। इस तरह युवा वैभव को सीनियर स्तर पर कप्तानी का बड़ा मौका मिला।
वैभव सूर्यवंशी ने रचा ऐतिहासिक रिकॉर्ड
ईशान किशन के मैदान से बाहर होने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने ईस्ट जोन की कमान संभाली। कप्तानी संभालते ही उन्होंने दलीप ट्रॉफी में नया इतिहास बना दिया। वैभव सीनियर टीम की कप्तानी करने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए। महज 15 साल की उम्र में उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। उनके सामने कई अनुभवी खिलाड़ी भी मैदान पर मौजूद थे। इसके बावजूद वैभव ने आत्मविश्वास के साथ टीम की अगुवाई की।
कप्तानी में लिया शानदार DRS फैसला
कप्तानी संभालने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने मैदान पर अपनी क्रिकेट समझ का शानदार उदाहरण दिया। सेंट्रल जोन की पारी के दौरान मुकेश कुमार की गेंद पर कैच की अपील हुई। अंपायर ने अपील को नकार दिया, जिसके बाद वैभव ने सीनियर खिलाड़ियों से चर्चा की। रिव्यू लेने की समय सीमा खत्म होने से कुछ सेकंड पहले उन्होंने DRS का फैसला किया। थर्ड अंपायर ने रिव्यू में बल्लेबाज को आउट करार दिया। इस फैसले से आर्यन जुयाल का महत्वपूर्ण विकेट ईस्ट जोन को मिल गया।
बल्ले से भी वैभव ने दिखाया दम
वैभव सूर्यवंशी ने इस मुकाबले में सिर्फ कप्तानी से ही प्रभावित नहीं किया। उन्होंने ईस्ट जोन की पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी भी की। ओपनिंग करते हुए वैभव ने 92 रनों की तेज और प्रभावी पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस पारी के दौरान उन्होंने दलीप ट्रॉफी में कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया। उनकी बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा।
57 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ा
वैभव की 92 रनों की पारी कई मायनों में खास रही। उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड लंबे समय से कायम था। वैभव ने करीब 57 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इतनी कम उम्र में सीनियर घरेलू क्रिकेट में ऐसा प्रदर्शन बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब उनकी कप्तानी के साथ बल्लेबाजी पर भी क्रिकेट विशेषज्ञों की नजर है।
युवा खिलाड़ी पर टिकी क्रिकेट जगत की नजरें
वैभव सूर्यवंशी लगातार अपने प्रदर्शन से चर्चा में बने हुए हैं। पहले उन्होंने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया और अब कप्तानी में भी अपनी समझ दिखाई। ईशान किशन की चोट के बाद मिली जिम्मेदारी को उन्होंने दबाव के बजाय मौके के रूप में लिया। DRS के सफल फैसले ने उनकी क्रिकेटिंग सोच को भी सामने रखा। महज 15 साल की उम्र में सीनियर स्तर पर कप्तानी करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि है। दलीप ट्रॉफी का यह मुकाबला वैभव के क्रिकेट सफर में यादगार अध्याय बन गया है।







