Reels and Spine Health: रील्स देखने की आदत रीढ़ की हड्डी पर कैसे डालती है असर?

Vaishali shinde
23 घंटे पहलेDigital India ka sapna aur karib aa raha hai.
Myra Dubey
1 दिन पहलेTechnology ke is new era mein India aage hai.
Neha Tripathi
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Rohan Desai
1 दिन पहलेTechnology ki yeh khabar future badal sakti hai!
Aarohi Chaudhary
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Arjun Singh
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रील्स देखने की आदत का रीढ़ की हड्डी पर असर
मोबाइल पर रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और दूसरी छोटी वीडियो देखने में घंटों बिताना आजकल आम हो गया है। लगातार स्क्रीन देखने की आदत का असर केवल आंखों और दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि शरीर की मुद्रा पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल चलाने से गर्दन, कंधों और पीठ पर दबाव बढ़ सकता है। 20 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के अवसर पर हड्डियों की सेहत और रीढ़ की देखभाल के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है। हालांकि, मोबाइल देखने की गलत मुद्रा और ऑस्टियोपोरोसिस अलग-अलग मुद्दे हैं; केवल रील्स देखने से ऑस्टियोपोरोसिस होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
गर्दन झुकाकर फोन देखने से बढ़ सकता है दर्द
यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम में न्यूरोसर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. गौरव बत्रा के मुताबिक, लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। फोन देखते समय सिर लगातार आगे या नीचे झुका रहने और पीठ को गोल करके बैठने से गर्दन तथा आसपास की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है। ऐसी मुद्रा लंबे समय तक बनी रहने पर गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों में परेशानी और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है। इसे आमतौर पर टेक्स्ट नेक कहा जाता है।
लगातार बैठे रहने से घट सकती है शारीरिक गतिविधि
लंबे समय तक रील्स स्क्रॉल करने से कई लोगों की दिनचर्या में चलने-फिरने और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम रह जाता है। एक ही स्थिति में लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियों में थकान और पीठ में असहजता हो सकती है। देर रात तक फोन इस्तेमाल करने से नींद का समय भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए स्क्रीन टाइम के साथ-साथ नींद, नियमित गतिविधि और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों की मजबूती पर पड़ता है असर
ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व और मजबूती कम हो सकती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी के शुरुआती चरण में कई बार स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त उपलब्धता, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय जांच महत्वपूर्ण हैं। उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। किसी व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा है या नहीं, इसका आकलन चिकित्सकीय सलाह से किया जाना चाहिए।
मोबाइल इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों की सलाह है कि फोन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखें, ताकि गर्दन को लगातार नीचे झुकाना न पड़े। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने के बजाय नियमित अंतराल पर ब्रेक लें, उठकर चलें और गर्दन तथा कंधों को हल्के ढंग से हिलाएं। बैठते समय पीठ को सहारा दें और पैरों को आरामदायक स्थिति में रखें। रील्स देखने के लिए समय निर्धारित करना और रोजमर्रा की गतिविधियों में चलने-फिरने को शामिल करना भी उपयोगी हो सकता है।
लगातार दर्द या सुन्नपन हो तो डॉक्टर से लें सलाह
यदि गर्दन या पीठ का दर्द लगातार बना रहे, हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो अथवा कमजोरी दिखाई दे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। लक्षणों को केवल मोबाइल इस्तेमाल का नतीजा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही मुद्रा, नियमित ब्रेक और सक्रिय दिनचर्या से स्क्रीन इस्तेमाल के दौरान होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।
स्पेशल अपडेट
विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल और गलत मुद्रा गर्दन तथा पीठ में परेशानी पैदा कर सकते हैं, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की मजबूती से जुड़ी अलग स्वास्थ्य स्थिति है। स्क्रीन टाइम सीमित रखने, नियमित गतिविधि करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से सेहत की बेहतर देखभाल की जा सकती है।








