Japan MMX Mission: जापान का MMX मिशन फोबोस से लाएगा 10 ग्राम मिट्टी

जापान का MMX मिशन फोबोस से लाएगा 10 ग्राम मिट्टी
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जापान का MMX मिशन मंगल के चांद फोबोस की करेगा जांच
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA का मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) मिशन मंगल के चांद फोबोस से मिट्टी के नमूने धरती पर लाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मिशन की योजना के अनुसार, यान मंगल तक पहुंचने के बाद फोबोस का अध्ययन करेगा और वहां से लगभग 10 ग्राम सामग्री इकट्ठा करेगा। इन नमूनों को जुलाई 2031 तक धरती पर लाने का लक्ष्य बताया गया है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस सामग्री से मंगल के इतिहास और उसके चंद्रमाओं की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी।

 

मंगल तक पहुंचने और नमूने जुटाने में लगेगा लंबा समय
इस मिशन में कई चरण शामिल हैं। लॉन्च के बाद यान को मंगल तक पहुंचने में करीब 10 महीने लगने का अनुमान है। इसके बाद वह फोबोस और मंगल के दूसरे चांद डीमोस का अध्ययन करेगा तथा सतह की तस्वीरें और नक्शे तैयार करेगा। प्रस्तावित योजना में पहले इडेफिक्स नामक छोटे रोवर को फोबोस की सतह पर भेजा जाएगा। इसके बाद मुख्य यान उपयुक्त स्थान पर उतरकर नमूने एकत्र करेगा। सतह की जांच और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करना इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

 

मिशन में पांच साल क्यों लगते हैं?
धरती से मंगल तक यात्रा के लिए यान का रास्ता और ईंधन की जरूरत बेहद सावधानी से तय करनी पड़ती है। ग्रहों की स्थिति के कारण कम ईंधन में यात्रा करने के अनुकूल अवसर सीमित समय पर मिलते हैं। फोबोस का गुरुत्वाकर्षण भी बहुत कमजोर है, इसलिए उसके आसपास यान की गति और स्थिति नियंत्रित करना सामान्य उपग्रह की कक्षा में जाने जैसा आसान नहीं है। इसके अलावा, लैंडिंग की जगह चुनने, सतह का अध्ययन करने और नमूने सुरक्षित तरीके से जुटाने में समय लगता है। वापसी यात्रा के लिए भी सही कक्षीय परिस्थितियों का इंतजार करना पड़ता है।

 

सिर्फ 10 ग्राम नमूना वैज्ञानिकों के लिए क्यों अहम है?
मात्रा में छोटा होने के बावजूद फोबोस से मिलने वाला नमूना वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रयोगशालाओं में इसकी संरचना और रासायनिक गुणों की जांच करके यह समझने की कोशिश की जाएगी कि फोबोस की उत्पत्ति कैसे हुई और उसका मंगल से क्या संबंध है। इससे मंगल के विकास, उसके चंद्रमाओं के निर्माण और सौरमंडल के शुरुआती इतिहास से जुड़े सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। मिशन के निष्कर्ष भविष्य में मंगल और उसके आसपास के क्षेत्र की खोज के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

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