अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 38 दोषियों की फांसी बरकरा: 18 साल बाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

18 साल बाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
प्रतिक्रियाएँ
Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

1 दिन पहले

Yeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Pooja Reddy

Pooja Reddy

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

1 दिन पहले

Aise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.

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गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 दोषियों की प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। जस्टिस ए.वाई. कोग्जे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने वर्ष 2022 में विशेष अदालत द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया।


 21 धमाकों ने दहला दिया था अहमदाबाद
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन आतंकी हमलों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसे भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है।


कोर्ट ने बताया 'दुर्लभ से दुर्लभतम' मामला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है। अदालत ने माना कि आतंकियों ने न केवल आम नागरिकों बल्कि घायलों का इलाज कर रहे अस्पतालों को भी निशाना बनाया, जिससे यह अपराध अत्यंत जघन्य और अमानवीय बन गया। इसी आधार पर मृत्युदंड को उचित ठहराया गया।

 

पीड़ित परिवारों को मुआवजे का आदेश
अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों के परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। फैसले के अनुसार मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को ₹5 लाख और सामान्य रूप से घायल लोगों को ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी।


इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े थे सभी दोषी
जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले के सभी दोषी प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन (IM) से जुड़े पाए गए थे। लंबी जांच, सैकड़ों गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विशेष अदालत ने 2022 में 49 दोषियों को सजा सुनाई थी, जिसे अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा है।


भारत के सबसे बड़े आतंकवाद मामलों में एक
यह फैसला भारत के न्यायिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी मामलों में से एक माना जा रहा है। लगभग 18 वर्ष तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दीं। अदालत के इस निर्णय को आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है, जबकि पीड़ित परिवारों ने इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

 

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Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

1 दिन पहले

Yeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Myra Dubey

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1 दिन पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Pooja Reddy

Pooja Reddy

1 दिन पहले

Gawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.

Aarohi Chaudhary

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1 दिन पहले

Aise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.

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