चित्रकूट में पुलिस एक्शन: 90 हजार ऑनलाइन ट्रांजैक्शन विवाद में कोतवाल लाइन हाजिर

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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में पुलिस विभाग में उस समय हड़कंप मच गया, जब ओवरलोड ट्रकों पर कार्रवाई के दौरान कथित ऑनलाइन लेनदेन का मामला सामने आया। आरोप है कि दो ओवरलोड ट्रकों को छोड़ने के एवज में 90 हजार रुपये एक दुकानदार के खाते में डलवाए गए।
सोशल मीडिया पर इस ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट वायरल होते ही मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और विभागीय जांच शुरू कर दी गई।
एसपी ने लिया सख्त एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर पाए जाने पर सदर कोतवाली प्रभारी श्याम प्रताप पटेल को बुधवार देर रात लाइन हाजिर कर दिया गया। इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
एएसपी को सौंपी गई जांच
पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक सत्यपाल सिंह को सौंपी गई है। उन्होंने पुष्टि की है कि जांच जारी है और सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
हालांकि, पुलिस अधीक्षक की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लगातार घटनाओं से बढ़ी चिंता
यह कार्रवाई सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है। चित्रकूट में हाल के दिनों में कई घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं— कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के साथ लूट का प्रयास, लक्ष्मण पहाड़ी के पास मारपीट की घटना, महिला से मंगलसूत्र छीनने की वारदात, इन घटनाओं में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई, जिससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा।
वायरल स्क्रीनशॉट बना बड़ा सबूत
मंगलवार शाम को सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्क्रीनशॉट में एक मोबाइल और कंप्यूटर दुकानदार के खाते में 90 हजार रुपये आने की बात सामने आई। आरोप लगाया गया कि यह रकम पुलिस द्वारा ट्रकों को छोड़ने के बदले डलवाई गई थी। इस डिजिटल सबूत ने मामले को और गंभीर बना दिया और विभाग की किरकिरी हुई।
कोतवाली की स्थिति और आगे की कार्रवाई
फिलहाल सदर कोतवाली का कामकाज अस्थायी रूप से अन्य अधिकारियों द्वारा संभाला जा रहा है। नए प्रभारी की नियुक्ति अभी तक नहीं की गई है। पुलिस विभाग का कहना है कि जल्द ही एक सख्त और सक्षम अधिकारी की तैनाती की जाएगी, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का संकेत माना जा रहा है। ओवरलोड वाहनों के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के इस मामले ने नई बहस छेड़ दी है।
चित्रकूट का यह मामला पुलिस सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।







