Crop Survey Extortion Allegation: फसल सर्वे के नाम पर वसूली का आरोप
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Sai Mehta
51 मिनट पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ada khan
59 मिनट पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Rohan Desai
2 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Monika Das
3 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के चरखारी क्षेत्र के नटर्रा गांव में फसल नुकसान के सर्वे को लेकर किसानों के आक्रोश का मामला सामने आया है। अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सर्वे करने पहुंचे दो निजी सर्वेयरों पर किसानों ने कथित तौर पर पैसे मांगने और अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर वसूली करने के आरोप लगाए। ग्रामीणों का दावा है कि सर्वे के दौरान किसानों से रकम मांगी जा रही थी और इसी बात को लेकर गांव में विवाद बढ़ गया। मामला सामने आने के बाद किसानों ने दोनों सर्वेयरों को पकड़ लिया और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
महिलाओं ने पहनाई चूड़ी और पेटीकोट
विरोध के दौरान गांव की महिलाओं ने दोनों सर्वेयरों को चूड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज पहनाए तथा माथे पर लाली-बिंदी लगाई। इसके बाद उनके गले में जूतों की माला डालकर पूरे गांव में घुमाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। ग्रामीणों का कहना था कि किसानों की खराब फसल और आर्थिक परेशानी के बीच सर्वे के नाम पर पैसे मांगना गंभीर मामला है। बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों सर्वेयरों को अपने कब्जे में ले लिया।
करीब दो लाख रुपये लेने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों में ग्रामीणों की शिकायत के हवाले से दावा किया गया है कि दोनों सर्वेयरों ने कई किसानों से एक से पांच हजार रुपये तक की रकम मांगी थी और करीब दो लाख रुपये की वसूली किए जाने का आरोप लगाया गया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक किसानों से ज्यादा नुकसान दर्ज करने और अधिक बीमा राशि दिलाने का भरोसा देकर रकम मांगी गई थी। हालांकि यह रकम वास्तव में कितनी ली गई, किन किसानों से ली गई और आरोपों में कितनी सच्चाई है, इसका अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही होगा। फिलहाल इन दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कृषि विभाग और पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। रिपोर्टों के अनुसार दोनों सर्वेयरों को पुलिस के सुपुर्द किया गया और मामले की जांच शुरू की गई है। कृषि विभाग की ओर से भी आरोपों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सर्वेयरों की भूमिका क्या थी और किसानों से कथित तौर पर पैसे लिए गए थे या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
वायरल वीडियो के बाद मामला गरमाया
सर्वेयरों को महिलाओं के कपड़े पहनाकर गांव में घुमाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद यह घटना तेजी से चर्चा में आ गई। इस मामले में स्थानीय भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत का नाम भी रिपोर्टों में सामने आया है और कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि ग्रामीणों ने उनसे फोन पर बात की थी। बाद की रिपोर्टों में विधायक की कथित भूमिका और उनके निर्देशों से जुड़े वीडियो का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन घटनाक्रमों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में विवरण अलग हैं, इसलिए किसी भी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना उचित होगा।
किसानों की शिकायत पर अब जांच का इंतजार
महोबा की इस घटना ने फसल नुकसान के सर्वे और किसानों तक बीमा लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कृषि मंत्रालय की आधिकारिक योजना है और फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया के तहत सर्वे कराया जाता है। इस मामले में किसानों ने कथित वसूली की शिकायत की है, जबकि संबंधित विभाग और पुलिस जांच कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल सर्वेयरों पर लगे वसूली के आरोपों को प्रमाणित तथ्य के बजाय शिकायत और आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।





