गुप्त नवरात्रि 2026 आज से शुरू: मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नौ दिवसीय शक्ति आराधना का शुभारंभ

Anjali Patil
2 हफ्ते पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Aditya Verma
2 हफ्ते पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Kavya Mishra
2 हफ्ते पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Arjun Singh
2 हफ्ते पहलेSpirituality hi asli shakti hai is duniya mein.
Krishna Yadav
2 हफ्ते पहलेBhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.
आज 15 जुलाई 2026 से आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के साथ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व में देशभर के देवी मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में मां दुर्गा की आराधना शुरू हो गई है। पहले दिन भक्त मां शैलपुत्री की पूजा कर शक्ति, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना, आत्मिक उन्नति और देवी उपासना का विशेष अवसर मानी जाती है।
साल में चार बार आती हैं नवरात्रि
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें चैत्र और शारदीय (आश्विन) नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है, जबकि आषाढ़ और माघ में आने वाली नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में देवी शक्ति की विशेष उपासना की जाती है और साधक आध्यात्मिक सिद्धि की कामना से साधना करते हैं।
दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व
गुप्त नवरात्रि में देवी सती के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें मां काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन स्वरूपों की विशेष साधना तांत्रिक परंपरा से जुड़े साधकों द्वारा गुरु के मार्गदर्शन में की जाती है। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की सात्विक पूजा और भक्ति को ही श्रेष्ठ माना गया है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, नौ दिनों तक होगा नवदुर्गा का पूजन
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसके बाद क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। श्रद्धालु इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, सिद्धकुंजिका स्तोत्र और दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। कई भक्त श्रद्धा के अनुसार व्रत रखकर माता की उपासना भी करते हैं।
क्या गृहस्थ भी कर सकते हैं घटस्थापना?
धार्मिक ग्रंथों और देवी उपासना की परंपरा के अनुसार गृहस्थ भी गुप्त नवरात्रि में कलश स्थापना (घटस्थापना) कर सकते हैं। देवी भागवत महापुराण और मार्कण्डेय पुराण में देवी उपासना को सभी भक्तों के लिए कल्याणकारी बताया गया है। इसलिए श्रद्धा और सात्विक भाव से गृहस्थ परिवार भी मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।
हालांकि धार्मिक जानकारों के अनुसार बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के तांत्रिक साधना, विशेष बीज मंत्रों या जटिल अनुष्ठानों का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 15 जुलाई 2026 को गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कलश स्थापना कर देवी मां का आवाहन करना शुभ माना गया है।
घटस्थापना की संक्षिप्त पूजा विधि
गृहस्थ श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पूजा स्थान की सफाई कर लाल या पीले वस्त्र से सजी चौकी पर कलश स्थापित कर सकते हैं। कलश में गंगाजल, सुपारी, अक्षत और सिक्का रखने के बाद आम के पत्तों तथा नारियल से स्थापना की जाती है। इसके बाद मां दुर्गा का आवाहन कर दीप प्रज्वलित किया जाता है और पुष्प, चंदन, धूप, नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, सिद्धकुंजिका स्तोत्र अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन, संयम, स्वच्छता और नियमित पूजा का विशेष महत्व होता है। घर में घटस्थापना होने पर सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहिए तथा अनावश्यक विवाद और कलह से बचना चाहिए। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यदि किसी ने तांत्रिक दीक्षा नहीं ली है, तो उन्हें केवल सात्विक पूजा-पद्धति का ही पालन करना चाहिए।
नवरात्रि और ऋतु परिवर्तन का संबंध
नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक मानी जाती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि ग्रीष्म ऋतु के समापन और वर्षा ऋतु के आगमन के संधिकाल में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय देवी आराधना से मन, शरीर और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
व्रत और संयम का महत्व
आयुर्वेद में उपवास और संयमित आहार को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है। नवरात्रि के दौरान कई श्रद्धालु फलाहार और सात्विक भोजन का पालन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित उपवास शरीर को आराम देने और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
श्रद्धा और मर्यादा के साथ करें देवी आराधना
धार्मिक परंपराओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि आत्मचिंतन, संयम और शक्ति उपासना का पर्व है। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए सात्विक पूजा, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा ही सर्वोत्तम साधना मानी गई है।








