Punjab Launches Major Anti Drug Drive: पंजाब में नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन

Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Aarav Sharma
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Trapti Tanwar
21 मिनट पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Nidhi kumari
2 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Aditya Verma
2 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में मार्च 2025 से चल रही ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। पंजाब के DGP गौरव यादव के मुताबिक 10 सितंबर 2026 तक अभियान के दौरान 60,582 FIR दर्ज कर 79,784 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 708 बड़े तस्कर भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक 354 कमर्शियल स्तर के मामलों में इन बड़े तस्करों पर कार्रवाई की गई है। अभियान के दौरान 3,803 किलोग्राम हेरोइन, 976 किलोग्राम अफीम, 46 हजार टन से अधिक पोस्त की भूसी, 1,325 किलोग्राम गांजा और 78 लाख से ज्यादा नशीली गोलियां एवं कैप्सूल बरामद किए गए हैं।
हेल्पलाइन से मिली सूचनाओं ने बढ़ाई कार्रवाई
पंजाब सरकार की मुहिम में आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। सेफ पंजाब हेल्पलाइन पर 1 मार्च 2025 से 3 सितंबर 2026 के बीच कुल 51,979 गुप्त सूचनाएं प्राप्त हुईं। अधिकारियों के अनुसार इन सूचनाओं के आधार पर नशा तस्करी से जुड़े मामलों में 25,339 गिरफ्तारियां की गईं। यह आंकड़ा बताता है कि अभियान में पुलिस कार्रवाई के साथ नागरिकों से मिलने वाली खुफिया जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। हेल्पलाइन से मिली सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध नशा तस्करी और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
13 हजार गांवों तक पहुंची जागरूकता मुहिम
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का फोकस केवल गिरफ्तारी और बरामदगी तक सीमित नहीं है। पंजाब में इसे गांवों और स्थानीय समुदायों तक ले जाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम और जनभागीदारी को भी बढ़ाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अभियान की पहुंच करीब 13,000 गांवों तक हो चुकी है और लगभग 1.25 लाख स्वयंसेवक तथा Village Defence Committees स्थानीय स्तर पर जागरूकता और निगरानी में सहयोग कर रहे हैं। सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के खिलाफ सामाजिक भागीदारी मजबूत करने और युवाओं को इस समस्या से दूर रखने पर है।
फार्मास्युटिकल नशीली दवाएं बनी नई चुनौती
पंजाब में कार्रवाई बढ़ने के साथ नशे की सप्लाई के बदलते तरीकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। रिपोर्टों में फार्मास्युटिकल ड्रग्स और नशीली गोलियों की तस्करी को नई चुनौती के रूप में सामने आने की बात कही गई है। पुलिस की बड़ी बरामदगी में लाखों नशीली गोलियां और कैप्सूल शामिल हैं, जबकि राज्य सरकार दूसरे राज्यों के साथ समन्वय कर अवैध सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क पर कार्रवाई की बात कह रही है। ऐसे में अभियान का फोकस अब सीमा पार से आने वाले नशे के साथ-साथ अंतरराज्यीय सप्लाई नेटवर्क पर भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
नशा मुक्ति और पुनर्वास पर भी जोर
पंजाब सरकार की रणनीति में पुलिस कार्रवाई के साथ इलाज और पुनर्वास को भी शामिल किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले 2024 के 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गए, यानी करीब 164 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। जुलाई 2026 तक भी 14 हजार से ज्यादा लोगों के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल होने की जानकारी सामने आई है। सरकार इस बढ़ोतरी को ज्यादा लोगों के इलाज के लिए आगे आने और नशा मुक्ति व्यवस्था तक पहुंच बढ़ने से जोड़ रही है।
पुलिस कार्रवाई के साथ सामाजिक आंदोलन बनाने की कोशिश
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के आंकड़े पंजाब में नशे के खिलाफ बड़े पैमाने पर चल रही सरकारी कार्रवाई को दिखाते हैं। हजारों FIR, करीब 80 हजार गिरफ्तारियां, बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी और गांव स्तर पर स्वयंसेवकों की भागीदारी इस अभियान के अलग-अलग हिस्से हैं। हालांकि इन आंकड़ों के आधार पर पंजाब को पूरी तरह नशामुक्त घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन सरकार की मौजूदा रणनीति में एनफोर्समेंट, जागरूकता, नागरिक सूचना और पुनर्वास—चारों पहलुओं को साथ लेकर चलने पर जोर दिखाई देता है।






