Rama Ekadashi 2026: रमा एकादशी आज, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व

रमा एकादशी आज, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व
प्रतिक्रियाएँ
Neha Tripathi

Neha Tripathi

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Sneha Menon

Sneha Menon

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Arjun Singh

Arjun Singh

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Ada khan

Ada khan

1 दिन पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Aarav Sharma

Aarav Sharma

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Comments • Reactions • Feedback

Rama Ekadashi 2026: आज रमा एकादशी, जानें पूजा विधि और महत्व

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस साल यह व्रत 5 नवंबर 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत और विधि-विधान से पूजा करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है।

 

रमा एकादशी का महत्व
रमा एकादशी का नाम माता लक्ष्मी के एक स्वरूप रमा के नाम पर पड़ा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह एकादशी दिवाली से कुछ दिन पहले आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

 

एकादशी की तिथि
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11:03 बजे शुरू हुई और 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जा रहा है।

 

व्रत और पारण की तारीख
रमा एकादशी व्रत और पारण से जुड़ी प्रमुख जानकारियां इस प्रकार हैं:

  • व्रत की तारीख: 5 नवंबर 2026, गुरुवार

  • तिथि शुरू: 4 नवंबर, सुबह 11:03 बजे

  • तिथि समाप्त: 5 नवंबर, सुबह 10:35 बजे

  • पारण: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार

 

विष्णु पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है।

 

माता लक्ष्मी की पूजा
रमा माता लक्ष्मी के नामों में से एक है। इसी वजह से इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि आती है। कई स्थानों पर इस एकादशी को रंभा एकादशी भी कहा जाता है।

 

सुबह की पूजा विधि
रमा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।

 

भगवान को चढ़ाएं तुलसी
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ भी कर सकते हैं।

 

आरती और भजन-कीर्तन
पूजा पूरी होने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रखें। धार्मिक परंपरा में रात को भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु के नाम का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

 

चंद्रभागा और शोभन की कथा
रमा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा राजा मुचुकुंद की बेटी चंद्रभागा और उनके पति शोभन की है। कथा के अनुसार, एक बार शोभन अपनी पत्नी के मायके पहुंचे। उसी दौरान रमा एकादशी का व्रत पड़ा। राजा के यहां एकादशी के दिन सभी के लिए व्रत रखना जरूरी था।

 

शोभन को मिला पुण्य
शोभन शारीरिक रूप से कमजोर थे, लेकिन उन्होंने भी एकादशी का व्रत रखने का फैसला किया। पौराणिक कथा के अनुसार, व्रत पूरा होने के बाद उनका निधन हो गया। हालांकि, एकादशी व्रत के पुण्य से उन्हें मंदराचल पर्वत पर एक सुंदर नगर और राज्य प्राप्त हुआ।

 

चंद्रभागा ने संभाला राज्य
कथा के अनुसार, बाद में चंद्रभागा ने भी अपने व्रत के पुण्य से उस राज्य को स्थिर बनाने में मदद की। यह कथा एकादशी व्रत की धार्मिक महिमा और श्रद्धा के महत्व को बताने के लिए सुनाई जाती है।

 

व्रत में क्या खाएं?
एकादशी के दिन अनाज और चावल खाने से परहेज करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और परिवार की परंपरा के अनुसार फलाहार या निर्जल व्रत रखते हैं। फलाहार में फल, दूध और मखाने जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं।

 

इन बातों का रखें ध्यान
व्रत में चावल, गेहूं और दालों से परहेज किया जाता है। पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और सामर्थ्य के अनुसार ही उपवास करें।

 

कब करें व्रत पारण?
रमा एकादशी के व्रत का पारण 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार, द्वादशी तिथि पर उचित समय में व्रत खोलना चाहिए। पारण का सटीक समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित रहेगा।

 

धार्मिक मान्यताओं पर आधारित
इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार पूजा-विधि और समय में अंतर हो सकता है।

प्रतिक्रियाएँ
Neha Tripathi

Neha Tripathi

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Kabir Shukla

Kabir Shukla

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Sneha Menon

Sneha Menon

1 दिन पहले

Kundali dekhkar bohot kuch pehle pata chal jata hai.

Taushif Shekh

Taushif Shekh

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Arjun Singh

Arjun Singh

1 दिन पहले

Bhagwan par bharosa rakhna chahiye, woh sab sahi karenge.

Ada khan

Ada khan

1 दिन पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Aarav Sharma

Aarav Sharma

1 दिन पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

Comments • Reactions • Feedback