Madhya Pradesh Takes Rs 2,500 Crore New Loan: मध्य प्रदेश पर फिर 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज

मध्य प्रदेश पर फिर 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज
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Krishna Yadav

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मध्य प्रदेश सरकार ने फिर लिया 2,500 करोड़ रुपये का कर्ज
मध्य प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 में एक बार फिर बाजार से 2,500 करोड़ रुपये की उधारी की है। यह राशि सरकारी प्रतिभूतियों के री-इश्यू के जरिए जुटाई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने इस उधारी का उद्देश्य विकास कार्यों और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना बताया है।

 

तीन सरकारी प्रतिभूतियों से जुटाई राशि
2,500 करोड़ रुपये की यह उधारी तीन सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए जुटाई गई। इसमें 700 करोड़ रुपये की प्रतिभूति पर 7.39 प्रतिशत, 900 करोड़ रुपये पर 7.58 प्रतिशत और अन्य 900 करोड़ रुपये की प्रतिभूति पर 7.66 प्रतिशत ब्याज दर दर्ज है। इन प्रतिभूतियों की अवधि क्रमशः 8, 12 और 22 वर्ष है। सबसे लंबी अवधि वाली 900 करोड़ रुपये की प्रतिभूति वर्ष 2048 में परिपक्व होगी।

 

चालू वित्त वर्ष में उधारी 53,900 करोड़ रुपये पहुंची
नई उधारी के बाद वित्त वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश सरकार की अब तक की बाजार उधारी करीब 53,900 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्टों में राज्य की कुल बकाया देनदारी 5,42,614 करोड़ रुपये यानी करीब 5.43 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।

 

सितंबर में पहले भी लिया गया था 3,600 करोड़ का कर्ज
सितंबर की शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार ने 3,600 करोड़ रुपये की बाजार उधारी की थी। इसके बाद अब 2,500 करोड़ रुपये की नई उधारी की गई है। सरकारी दस्तावेजों में इन उधारियों का उद्देश्य विकास और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना बताया गया है।

 

लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त भी जारी
इसी बीच 13 सितंबर 2026 को लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई। इस दौरान 1.25 करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के खातों में 1,835 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि DBT के जरिए भेजी गई। प्रत्येक पात्र महिला को 1,500 रुपये की मासिक सहायता दी गई।

2026-27 में 1,06,190 करोड़ रुपये की सकल उधारी का अनुमान
मध्य प्रदेश के 2026-27 बजट विश्लेषण के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष के लिए राज्य की सकल उधारी 1,06,190 करोड़ रुपये अनुमानित है। इसी बजट में राजकोषीय घाटा 71,458 करोड़ रुपये यानी GSDP का 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।

 

नई उधारी से अकेले वित्तीय स्थिति का निष्कर्ष नहीं
2,500 करोड़ रुपये की नई उधारी को राज्य की पूरी वित्तीय स्थिति का अकेला संकेतक नहीं माना जा सकता। सरकार ने उधारी का उद्देश्य विकास और उत्पादक योजनाओं को वित्त उपलब्ध कराना बताया है। राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करते समय कर्ज, ब्याज भुगतान, राजकोषीय घाटे, बजट प्रावधान और भविष्य की देनदारियों सहित व्यापक वित्तीय आंकड़ों को देखना जरूरी होता है।

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