Oil Prices Near $100: कच्चा तेल फिर महंगा, ब्रेंट 100 डॉलर के करीब

Sneha Menon
0 सेकंड पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Taushif Shekh
23 मिनट पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Aarohi Chaudhary
54 मिनट पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Sonu rai
2 घंटे पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Diya Gupta
3 घंटे पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Taushif Shekh
4 घंटे पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पूरे हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में इस सप्ताह करीब 13 फीसदी तक गिरावट आई थी। हालांकि, शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड एक बार फिर उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।
शुक्रवार को ब्रेंट और WTI क्रूड में तेजी
शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 99.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.15 फीसदी बढ़कर 91.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
इससे पहले बुधवार को तेल बाजार में भारी बिकवाली हुई थी। उस दिन दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क 8 फीसदी से ज्यादा टूटकर 31 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए थे। हालांकि, यह गिरावट ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और गुरुवार शाम से कीमतों में दोबारा तेजी शुरू हो गई।
गुरुवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.8 फीसदी उछलकर 98.29 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इसी तरह अमेरिकी WTI क्रूड में भी 2.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 90.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गुरुवार से शुरू हुई तेजी शुक्रवार सुबह भी जारी रही।
अमेरिकी चुनाव के बाद बदली कूटनीतिक स्थिति
तेल बाजार में तनाव कम होने की उम्मीद अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद बढ़ी है। चुनाव में डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। माना जा रहा है कि इस राजनीतिक बदलाव से ईरान के खिलाफ युद्ध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिलने वाला समर्थन सीमित हो सकता है।
दूसरी ओर, ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर मध्यस्थों की ओर से दिए गए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। इन घटनाक्रमों ने बाजार को कुछ राहत दी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का माहौल बनाया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की शर्तें
कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों के बावजूद तेल की आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह नहीं खोलेगा।
इसके साथ ही ईरान ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और जब्त की गई संपत्तियों को तुरंत मुक्त करने की मांग भी रखी है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।
समुद्र में जहाजों से जुड़ी घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा लगातार बना हुआ है। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के मुताबिक, रविवार से अब तक फारस की खाड़ी में जहाजों से जुड़ी कम से कम पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति वाले रास्तों का इस्तेमाल करने की कोशिश के दौरान दो तेल टैंकरों और एक टगबोट में अलग-अलग घटनाओं में आग लग गई। इन घटनाओं ने समुद्री मार्ग से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हूती हमलों और रूस की रिफाइनरियों पर हमले का असर
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। संभावित खतरों को देखते हुए सऊदी अरब ने लाल सागर स्थित अपने तेल निर्यात केंद्र यानबू के लिए अलर्ट जारी किया है।
दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर नए सिरे से हमले किए हैं। इससे रूस की डीजल निर्यात करने की क्षमता पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इन घटनाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
फिर 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है ब्रेंट क्रूड
आपूर्ति के मोर्चे पर एक राहत की बात यह है कि खाड़ी देशों से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, तेल की ढुलाई यानी ट्रांसपोर्टेशन का खर्च अब भी काफी ऊंचा बना हुआ है।
रिसर्च फर्म यूरेशिया ग्रुप ने ईरान पर नए अमेरिकी हमलों की आशंका का अनुमान 65 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दिया है। वहीं, कूटनीतिक समझौते की संभावना का अनुमान 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया गया है। इसके उलट, लंबे समय तक गतिरोध बने रहने की आशंका 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दी गई है।
यूरेशिया ग्रुप ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।








