₹20,000 करोड़ का GainBitcoin घोटाला: CBI की बड़ी कार्रवाई

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भारत के सबसे चर्चित क्रिप्टोकरेंसी घोटालों में से एक GainBitcoin क्रिप्टो स्कैम में केंद्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई की है। Central Bureau of Investigation (CBI) ने लगभग ₹20,000 करोड़ के कथित क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में Darwin Labs के सह-संस्थापक और CTO आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह घोटाला GainBitcoin नाम की पोंजी स्कीम से जुड़ा है, जिसमें देशभर के हजारों निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया और बाद में धन का दुरुपयोग किया गया।
एयरपोर्ट से गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपी
CBI अधिकारियों के अनुसार आयुष वार्ष्णेय देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे थे। उनके खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया जा चुका था। जब वे Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport से विदेश भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मिला और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद मंगलवार को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है GainBitcoin पोंजी स्कीम?
यह घोटाला वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। योजना को कथित तौर पर Amit Bhardwaj (अब मृत) और उनके भाई Ajay Bhardwaj द्वारा संचालित किया गया था। इस योजना में निवेशकों को हर महीने 10% तक बिटकॉइन रिटर्न देने का वादा किया जाता था। लोगों से कहा जाता था कि यह कमाई Bitcoin माइनिंग से होगी।
निवेशकों को बाहरी क्रिप्टो एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर कंपनी के प्लेटफॉर्म पर तथाकथित क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
Darwin Labs की क्या थी भूमिका?
जांच में सामने आया है कि Darwin Labs Private Limited ने इस पूरे नेटवर्क के लिए डिजिटल तकनीकी ढांचा तैयार किया था।
CBI के अनुसार कंपनी ने कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म विकसित किए थे, जैसे:
GBMiners.com – बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म,
CoinBank – बिटकॉइन वॉलेट,
Bitcoin पेमेंट गेटवे,
GainBitcoin वेबसाइट,
इन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को जोड़ने और निवेश करवाने का काम किया जाता था।
MCAP टोकन और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का इस्तेमाल
जांच एजेंसी के मुताबिक आरोपियों ने MCAP नामक क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़े ERC-20 स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट को डिजाइन और डेवलप किया था। शुरुआत में निवेशकों को बिटकॉइन में भुगतान किया गया, लेकिन 2017 के बाद भुगतान अचानक MCAP टोकन में किया जाने लगा, जिसकी कीमत बिटकॉइन से काफी कम थी। इस बदलाव से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
कैसे चल रही थी पोंजी स्कीम?
CBI के अनुसार यह योजना मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) मॉडल पर आधारित थी।
पुराने निवेशकों को नए निवेशक जोड़ने पर बोनस दिया जाता था, नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था, जब नए निवेशकों का प्रवाह कम हुआ, तो स्कीम ढहने लगी, इसी कारण इसे पोंजी स्कीम माना जा रहा है।
देशभर में दर्ज हुईं कई एफआईआर
इस घोटाले के चलते देश के कई राज्यों में मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें शामिल हैं: जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल | मामले की व्यापकता और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं को देखते हुए Supreme Court of India ने इस मामले की जांच CBI को सौंप दी थी।
ED भी कर रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
इस मामले में Enforcement Directorate (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रही है। ED अब तक भारत और विदेशों में कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है, जिनमें दुबई के छह ऑफिस भी शामिल बताए जाते हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस स्कीम में करीब 29,000 बिटकॉइन का लेन-देन हुआ था।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
CBI अब इस घोटाले से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी का फोकस इन बिंदुओं पर है:
देश-विदेश में भेजे गए पैसों का पता लगाना,
अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी,
निवेशकों की रकम की रिकवरी,
जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटालों में से एक हो सकता है।








