OTP और लिंक के बिना बैंक खाते से उड़ाए लाखों: साइबर ठगी का नया ‘Silent Fraud’ बना बड़ा खतरा

Anika Rajput
1 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Navya Nair
1 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Neel Saxena
5 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Aryan Malhotra
6 घंटे पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Pihu Agarwal
7 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Aryan Malhotra
8 घंटे पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
साइबर ठगी के मामलों में अपराधियों के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। अब ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने न तो किसी अनजान व्यक्ति को OTP बताया और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, इसके बावजूद उनके बैंक खातों से लाखों रुपये निकल गए। ग्वालियर में सामने आए तीन मामलों में कुल 8 लाख 54 हजार 600 रुपये की रकम गायब होने की शिकायत की गई है। पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है।
कारोबारी के खाते से 4.95 लाख रुपये ट्रांसफर
कुशलनगर पड़ाव निवासी 58 वर्षीय पवन कुमार शांडिल्य के मुताबिक उनका खाता SBI में है। 26 अगस्त की दोपहर उनके मोबाइल पर YONO ऐप से संबंधित एक OTP आया था। उनका कहना है कि उन्होंने यह OTP किसी के साथ साझा नहीं किया। कुछ समय बाद खाते से 4.95 लाख रुपये ट्रांसफर होने का मैसेज उनके मोबाइल पर आया।
खाते की जानकारी देखने पर पता चला कि रकम पश्चिम बंगाल में तापसी पाल नाम के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि OTP साझा किए बिना खाते से इतनी बड़ी रकम किस तरीके से ट्रांसफर हुई।
पुलिस जवान के पांच बैंक खातों में लगी सेंध
पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, तिघरा में पदस्थ जवान प्रभात शर्मा भी साइबर ठगी का शिकार हुए। उनके अनुसार अलग-अलग बैंकों में उनके पांच खाते हैं और 24 अगस्त को इन खातों से रकम गायब हो गई।
शिकायत के मुताबिक केनरा बैंक खाते से 99 हजार, HDFC बैंक से 19 हजार, SBI से 22 हजार, AU Small Finance Bank से 35 हजार और IDBI बैंक खाते से 99 हजार रुपये निकाले गए। इस तरह पांचों खातों से कुल 2 लाख 74 हजार रुपये गायब हुए।
PhonePe से पैसे भेजने गए तो खाते में नहीं मिली रकम
सौजना गांव निवासी किसान अर्जुन सिंह कुशवाह को अपने खाते से रकम निकलने का पता तब चला, जब वह PhonePe के जरिए किसी को पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहे थे। उनके यूनियन बैंक खाते में करीब 85,600 रुपये थे, लेकिन उस समय खाते में रकम मौजूद नहीं थी।
अर्जुन सिंह के मुताबिक उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनके खाते से रकम कब और किस तरीके से निकाली गई। उन्होंने भी किसी व्यक्ति को OTP देने या किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से इनकार किया है।
क्या है ‘Silent Fraud’?
साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे ऐसे तरीकों को आम तौर पर ‘Silent Fraud’ के रूप में देखा जा रहा है, जहां पीड़ित को ठगी की जानकारी तुरंत नहीं मिलती। कुछ मामलों में फर्जी क्रेडिट मैसेज या अन्य तरीके से खाताधारक को भ्रमित किया जा सकता है, जबकि दूसरी ओर मालवेयर, डिवाइस एक्सेस, सिम या अकाउंट से जुड़ी अन्य सुरक्षा कमजोरियों के जरिए डिजिटल लेनदेन का जोखिम पैदा हो सकता है।
हालांकि, ग्वालियर के इन मामलों में रकम वास्तव में किस तकनीकी माध्यम से निकाली गई, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस की डिजिटल जांच के बाद ही सामने आएगा।
फर्जी ‘Credit’ मैसेज से भी सावधान रहें
साइबर ठग लोगों को यह भरोसा दिलाने के लिए फर्जी मैसेज भेज सकते हैं कि उनके बैंक खाते में कोई रकम जमा हुई है। इसके बाद खाताधारक को तुरंत बैंक या UPI ऐप खोलकर बैलेंस चेक करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
ऐसे किसी अनजान मैसेज के आधार पर जल्दबाजी में UPI PIN, OTP या बैंकिंग संबंधी कोई गोपनीय जानकारी दर्ज करना जोखिम भरा हो सकता है। बैंक बैलेंस की जानकारी हमेशा आधिकारिक बैंकिंग ऐप या बैंक के विश्वसनीय माध्यम से ही जांचें।
ठगी होने पर तुरंत उठाएं ये कदम
अगर खाते से बिना अनुमति पैसे निकलने का पता चलता है तो सबसे पहले बैंक को इसकी सूचना दें और डिजिटल ट्रांजेक्शन को सुरक्षित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। इसके साथ ही भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है।
ऑनलाइन शिकायत National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती है। रकम निकलने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाए, उतना ही बेहतर रहता है क्योंकि शुरुआती कार्रवाई से ट्रांजेक्शन को ट्रेस या रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
OTP ही नहीं, पूरी डिजिटल सुरक्षा जरूरी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और बैंकिंग क्षेत्र की सामान्य सलाह यही है कि OTP और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें। साथ ही अनजान ऐप डाउनलोड करने, संदिग्ध लिंक खोलने और अज्ञात स्रोतों से आए मैसेज पर भरोसा करने से बचना चाहिए।
ग्वालियर में सामने आए मामलों ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि अगर खाताधारक की ओर से OTP साझा करने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने की बात सामने नहीं आई, तो बैंक खातों तक अनधिकृत पहुंच कैसे बनी। पुलिस की डिजिटल जांच से इस नए साइबर ठगी के तरीके की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।








