गांवों तक पहुंचेगा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड: आयुष्मान डिजिटल मिशन की बड़ी समीक्षा

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Rohan Desai
1 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Dhruv Bhatt
2 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Myra Dubey
2 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Aditya Verma
2 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Arjun Singh
4 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Ada khan
6 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Sneha Menon
7 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की समीक्षा के लिए मिशन संचालन समूह की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देश में डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और इसके अधिकतम उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रालय के अनुसार आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक के रूप में उभरा है। बैठक में मिशन की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।
94 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट बने
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत देश में लगभग 94 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी ABHA बनाए जा चुके हैं। इन खातों के माध्यम से नागरिकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड इन डिजिटल खातों से लिंक किए गए हैं। डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था से मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में रिकॉर्ड प्रबंधन और मरीजों की देखभाल की निरंतरता को बेहतर बनाने की संभावना है।
53 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं डिजिटल रजिस्टर से जुड़ीं
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत बड़ी संख्या में स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य पेशेवरों को राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्टरों से जोड़ा गया है। बैठक में बताया गया कि करीब 53 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं और लगभग 10 लाख स्वास्थ्य पेशेवर इन राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्टरों पर पंजीकृत हैं। इससे देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक व्यापक नेटवर्क तैयार करने में मदद मिली है। इस डिजिटल ढांचे का उद्देश्य मरीजों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के सुरक्षित आदान-प्रदान को आसान बनाना है। आने वाले समय में इस नेटवर्क के उपयोग को और बढ़ाने पर सरकार का ध्यान रहने वाला है।
गांवों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक डिजिटल रिकॉर्ड पहुंचाने पर जोर
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का अगला चरण देश के ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने से ग्रामीण मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे मरीज के इलाज से जुड़ी पिछली जानकारी को जरूरत पड़ने पर अधिक आसानी से देखा जा सकेगा। हालांकि डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता संबंधित स्वास्थ्य सुविधा, तकनीकी व्यवस्था और मरीज की सहमति आधारित रिकॉर्ड-शेयरिंग पर निर्भर करेगी। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और सुविधाजनक बन सकें।
सहमति आधारित सुरक्षित हेल्थ रिकॉर्ड पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच मिलनी चाहिए। डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि मरीजों को अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के इस्तेमाल पर बेहतर नियंत्रण और सुविधा देना भी है। इससे अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं के बीच देखभाल की निरंतरता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना और तकनीक के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना है। साथ ही डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली में सुरक्षा, पहुंच और उपयोग में आसानी को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रखा गया है।
AI समेत नई तकनीक से डिजिटल हेल्थ का विस्तार
बैठक में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के भविष्य के रोडमैप पर भी चर्चा की गई। इसमें डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक तेजी से अपनाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जैसी उभरती तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ सहयोग को और गहरा करके डिजिटल हेल्थ सिस्टम का विस्तार करना चाहती है। तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, रिकॉर्ड प्रबंधन और मरीजों की देखभाल में सुधार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। अगले चरण में मौजूदा डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे के अधिकतम उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य देश में अधिक मजबूत, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है।








