डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹83 लाख की ठगी: फर्जी IPS और नकली कोर्ट दिखाकर साइबर फ्रॉड

Aditya Verma
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Ishaan Tiwari
9 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Ananya Sharma
2 घंटे पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Kunal Rao
4 घंटे पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
कर्नाटक के बागलकोट जिले में साइबर अपराधियों ने 59 वर्षीय सरकारी कर्मचारी एच.वी. सुरेश राव को "डिजिटल अरेस्ट" का डर दिखाकर ₹83.22 लाख की ठगी कर ली। राव जल संसाधन विभाग के अपर कृष्णा प्रोजेक्ट में वरिष्ठ टाइपिस्ट हैं और जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। लगभग दो महीने तक चले इस साइबर फ्रॉड में अपराधियों ने फर्जी पुलिस जांच और वीडियो कॉल का सहारा लेकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
नकली पुलिस स्टेशन और फर्जी कोर्ट से बनाया भरोसा
ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि राव के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अश्लील संदेश भेजने में हुआ है। इसके बाद उन्हें स्काइप वीडियो कॉल पर जोड़ा गया, जहां नकली पुलिस स्टेशन, वर्दीधारी अधिकारी, फर्जी आईपीएस अफसर और यहां तक कि नकली अदालत का दृश्य दिखाकर गिरफ्तारी का डर पैदा किया गया। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव में पीड़ित पूरी तरह उनके झांसे में आ गया।
बैंक खातों से लेकर क्रिप्टोकरेंसी तक पहुंची ठगी
जालसाजों ने पहले "वेरिफिकेशन" के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में ₹45.22 लाख ट्रांसफर करवाए। इसके बाद पीड़ित को डिजिटल वॉलेट खुलवाकर ₹38 लाख की रकम USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलने और विदेशी वॉलेट में भेजने के लिए मजबूर किया गया। इस तरह कुल ₹83.22 लाख की ठगी को अंजाम दिया गया, जिससे यह राज्य के बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल हो गया।
संपर्क टूटते ही हुआ ठगी का एहसास
रकम ट्रांसफर होने के बाद सभी आरोपी अचानक गायब हो गए और अपने मोबाइल नंबर व ऑनलाइन प्रोफाइल बंद कर दिए। इसके बाद राव को एहसास हुआ कि वह सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत बागलकोट के CEN (Cyber, Economic & Narcotics) पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस क्रिप्टो वॉलेट और बैंक खातों की कर रही जांच
साइबर पुलिस अब अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट की डिजिटल ट्रेल खंगाल रही है। जांच एजेंसियां ट्रांजैक्शन से जुड़े खातों को फ्रीज करने और विदेशों तक पहुंचे डिजिटल फुटप्रिंट्स का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की चेतावनी- 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह किया है कि कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या अदालत व्हाट्सऐप, स्काइप या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही केस बंद कराने के लिए पैसे या क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करने को कहती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।








