ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग संग ट्रेड

Nisha Shah
2 महीने पहलेWorld leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.
Dev Kapoor
2 महीने पहलेWorld leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.
Dhruv Bhatt
2 महीने पहलेWorld leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.
Diya Gupta
2 महीने पहलेDuniya mein kuch bada hone wala hai, taiyar rehna hoga.
Reyansh Joshi
2 महीने पहलेAise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का 13 से 15 मई तक चला हाई-प्रोफाइल चीन दौरा अब समाप्त हो चुका है। साल 2017 के बाद यह उनका पहला आधिकारिक चीन दौरा था, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई थी। इस दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से कई दौर की बातचीत की, जिसमें व्यापार, ताइवान, ईरान युद्ध, रेयर अर्थ मिनरल्स और एडवांस चिप टेक्नोलॉजी जैसे बड़े वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
ईरान संकट पर Trump का बड़ा बयान
चीन दौरे के दौरान ट्रंप ने ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और जरूरत पड़ने पर अकेले भी इस संकट से निपट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि चीन का प्रभाव ईरान पर अहम है और इस विषय पर शी जिनपिंग के साथ विस्तृत बातचीत हुई।
ट्रेड वॉर और टैरिफ विवाद पर बातचीत
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे ट्रेड वॉर का मुद्दा भी इस यात्रा के केंद्र में रहा। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में एक-दूसरे पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित हुए।
बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि दोनों देश कुछ आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ विवादों को कम करने के लिए नए समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जबकि अमेरिका भी कुछ व्यापारिक राहत देने पर विचार कर सकता है।
चिप टेक्नोलॉजी और AI पर बढ़ा तनाव
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में सबसे संवेदनशील मुद्दों में एडवांस चिप टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल रहे। अमेरिका लगातार चीन को हाई-एंड कंप्यूटर चिप्स और उससे जुड़ी तकनीकों की सप्लाई सीमित कर रहा है। वहीं चीन अपनी घरेलू चिप इंडस्ट्री को मजबूत बनाने में तेजी से जुटा हुआ है ताकि अमेरिकी तकनीक पर निर्भरता कम की जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी सेक्टर दोनों देशों के रिश्तों का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है।
ताइवान मुद्दे पर चीन ने दोहराई “रेड लाइन”
चीन दौरे के दौरान ताइवान का मुद्दा भी बेहद अहम रहा। चीन ने स्पष्ट किया कि ताइवान उसके लिए “रेड लाइन” है और इस मामले में किसी भी विदेशी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार आपूर्ति के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इस विषय पर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं।
Boeing डील और कारोबारी समझौतों पर रही नजर
इस दौरे में कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी ट्रंप के साथ चीन पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक Elon Musk, Tim Cook और Boeing के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे। चर्चा है कि चीन ने बड़ी संख्या में बोइंग विमानों की खरीद में रुचि दिखाई है। अगर यह डील अंतिम रूप लेती है तो इसे एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी डील्स में गिना जा सकता है।
वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है यह मुलाकात
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार, टेक्नोलॉजी और मध्य पूर्व की राजनीति तेजी से बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई यह बातचीत आने वाले वर्षों में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय कर सकती है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच तनाव कम करेगा या नए वैश्विक टकराव की भूमिका तैयार करेगा।









