Trump Names Miller Chief: चुनावी हार के बाद ट्रम्प का बड़ा फैसला

Payal jadon
0 सेकंड पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेIs khabar ka asar kai deshon par padega.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेIndia ka is maamle mein kya role hoga?
चुनावी हार के बाद ट्रम्प का बड़ा फैसला
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के दौरान संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। उन्होंने सूजी वाइल्स का इस्तीफा स्वीकार करते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद रणनीतिकार स्टीफन मिलर को नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है।
आक्रामक एजेंडे पर कायम रहने का संकेत
चुनावी नतीजों के बाद नीतियों में बदलाव करने के बजाय ट्रम्प ने मिलर को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले को संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि राष्ट्रपति आने वाले दो वर्षों में विपक्षी डेमोक्रेट्स के दबाव के बावजूद अपने राजनीतिक और नीतिगत एजेंडे पर कायम रहना चाहते हैं।
आव्रजन नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार
स्टीफन मिलर को अमेरिकी राजनीति में ट्रम्प के सबसे प्रभावशाली और वैचारिक रूप से करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान वे ट्रम्प के भाषण लेखक के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद वे प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों को तैयार करने वाले प्रमुख रणनीतिकार बनकर उभरे।
अमेरिका फर्स्ट नीति के समर्थक
अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमा सुरक्षा मजबूत करने और ग्रीन कार्ड के नियम कड़े करने जैसी नीतियों के पीछे मिलर की अहम भूमिका रही है। वे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के समर्थक हैं और मानते हैं कि देश की सीमाओं की सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हित सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सूजी वाइल्स की कार्यशैली से अलग हैं मिलर
सूजी वाइल्स को ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने वाली अधिकारी के रूप में जाना जाता था। वे मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर संगठनात्मक काम संभालना पसंद करती थीं। ट्रम्प के 2024 के चुनाव अभियान को अनुशासित तरीके से संचालित करने का श्रेय भी उन्हें दिया गया था।
मीडिया में मुखर अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं मिलर
इसके विपरीत, स्टीफन मिलर सार्वजनिक मंचों और मीडिया में ट्रम्प की नीतियों का खुलकर और आक्रामक अंदाज में बचाव करते रहे हैं। गुरुवार रात सूजी वाइल्स ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर उनके योगदान की सराहना की और उन्हें अपने राजनीतिक संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की बात कही।
आव्रजन नीति को लेकर चुनाव में उठे सवाल
मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे जिन मुद्दों की चर्चा हो रही है, उनमें ट्रम्प प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियां भी शामिल हैं। एसोसिएटेड प्रेस के वोटर पोल के मुताबिक, 10 में से करीब 6 मतदाताओं का मानना था कि प्रशासन की आव्रजन कार्रवाई जरूरत से ज्यादा सख्त रही।
डेमोक्रेट्स ने नियुक्ति की आलोचना की
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने मिलर की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी जनता ने जिन नीतियों को नकारा, ट्रम्प उन्हीं को और आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ने चुनावी हार के बाद भी अपनी नीतियों से पीछे हटने के बजाय मिलर को अहम पद सौंपा है।
व्हाइट हाउस में अगले दो साल की चुनौती
चीफ ऑफ स्टाफ का पद व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में से एक माना जाता है। इस पद पर बैठा अधिकारी प्रशासन की प्राथमिकताओं, नियुक्तियों और नीतिगत फैसलों के बीच तालमेल बनाए रखने का काम करता है। संसद में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रम्प को अपने कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में विधायी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कार्यकारी शक्तियों के इस्तेमाल पर रहेगा जोर
ऐसी स्थिति में ट्रम्प प्रशासन कानून पारित कराने के बजाय राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों और प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकता है। मिलर को संघीय सरकार के नियमों और राष्ट्रपति की शक्तियों की अच्छी समझ है। ऐसे में आने वाले समय में वे डेमोक्रेट्स के विरोध के बीच ट्रम्प के एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।








