बांग्लादेश चुनाव 2026: ढाका की सत्ता से तय होगा दक्षिण एशिया का संतुलन

12 फ़रवरी 2026646
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ढाका की सत्ता से तय होगा दक्षिण एशिया का संतुलन

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12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं हैं, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक दिशा तय करने वाले चुनाव माने जा रहे हैं। करीब दो दशकों बाद पहली बार शेख हसीना की अवामी लीग सत्ता से बाहर है। ऐसे में ढाका की नई सरकार का गठन भारत, चीन, अमेरिका और पाकिस्तान के साथ समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।
करीब 13 करोड़ मतदाता इस बार मतदान करेंगे। यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि यह छात्र आंदोलन के बाद बना राजनीतिक परिदृश्य का पहला बड़ा लोकतांत्रिक परीक्षण है।

क्यों अलग है यह चुनाव?
2024 में छात्र आंदोलन ने शेख हसीना सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इसके बाद बनी अंतरिम सरकार ने देश को चुनाव की राह पर डाला। इस बार न शेख हसीना मैदान में हैं, न उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया, मतदाता केवल सांसद नहीं चुनेंगे, बल्कि ‘जुलाई चार्टर’ नामक संवैधानिक सुधार प्रस्ताव पर भी वोट करेंगे,
‘जुलाई चार्टर’ का उद्देश्य सत्ता के केंद्रीकरण को कम करना, संसद और न्यायपालिका को मजबूत करना और शासन में संतुलन स्थापित करना है। इसे लोकतंत्र की “मरम्मत प्रक्रिया” भी कहा जा रहा है।

चुनावी मैदान में कौन-कौन?
बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) : तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी इस समय सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही है। पहले भारत-विरोधी मानी जाने वाली पार्टी अब अपने रुख में नरमी दिखा रही है।
जमात-ए-इस्लामी : लंबे प्रतिबंध के बाद वापसी। अवामी लीग की अनुपस्थिति से बनी राजनीतिक खाली जगह को भरने की कोशिश। भारत के लिए ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील पार्टी।
नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) : छात्र आंदोलन से निकली पार्टी, युवाओं में लोकप्रिय। जमात के साथ गठबंधन में।

मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात गठबंधन के बीच माना जा रहा है।

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