ट्रंप का सनसनीखेज दावा: अगर मैंने दखल न दिया होता तो शहबाज शरीफ मारे जाते

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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में दावा किया कि अगर उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष में हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif मारे जा सकते थे और करीब 3.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी।
ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान न्यूक्लियर वॉर की कगार पर थे और उनकी पहल के बाद ही दोनों देशों के बीच फुल और इमीडिएट सीजफायर संभव हो पाया।
“मेरे पहले 10 महीनों में आठ जंगें रुकवाईं”
ट्रंप ने कांग्रेस में कहा कि अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दस महीनों में उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के अलावा इजरायल-हमास, सर्बिया-कोसोवो और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे संघर्षों का भी जिक्र किया।
ट्रंप के मुताबिक, “अगर मैं दखल नहीं देता तो पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध छिड़ सकता था।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने खुद उनसे कहा था कि उनकी मध्यस्थता के बिना भारी जनहानि हो सकती थी।
7 मई से शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’
भारत ने 7 मई 2025 को Operation Sindoor शुरू किया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी।
ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और चार दिनों तक सैन्य टकराव चला।
भारत ने खारिज किया ट्रंप का दावा
भारत ने ट्रंप के दावों को पहले भी खारिज किया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा था कि सीजफायर दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच बातचीत से हुआ था, किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी साफ किया था कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हॉटलाइन पर संपर्क कर संघर्ष विराम का अनुरोध किया था।
ट्रंप ने कांग्रेस में गिनाईं उपलब्धियां
अपने संबोधन में ट्रंप ने अर्थव्यवस्था, टैरिफ पॉलिसी, दवाओं की कीमतों में कमी, हाउसिंग पॉलिसी और बॉर्डर सिक्योरिटी पर भी अपनी उपलब्धियां गिनाईं।
उन्होंने कहा: “एक साल में अमेरिका ने ऐसा बदलाव देखा है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ।” ट्रंप ने दावा किया कि उनकी नीतियों के कारण अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत और समृद्ध हुआ है।
क्या सच में टल गया न्यूक्लियर युद्ध?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव जरूर बढ़ा था, लेकिन आधिकारिक रूप से किसी न्यूक्लियर हमले की तैयारी की पुष्टि नहीं हुई थी। भारत लगातार यह कहता रहा है कि सैन्य कार्रवाई और उसके बाद का सीजफायर पूरी तरह द्विपक्षीय चैनल के जरिए तय हुआ।
विवाद क्यों बढ़ रहा है?
ट्रंप पहले भी 80 से ज्यादा बार भारत-पाक संघर्ष रोकने का दावा कर चुके हैं। भारत हर बार इन दावों को खारिज करता रहा है। पाकिस्तान की ओर से भी इस दावे पर आधिकारिक स्पष्टता सीमित रही है। अब ट्रंप के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा फिर से वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है।








