Erdogan UNGA Speech: UN में एर्दोगन का बड़ा भाषण

UN में एर्दोगन का बड़ा भाषण
प्रतिक्रियाएँ
Anil Sen

Anil Sen

0 सेकंड पहले

International politics bahut tezi se badal rahi hai.

CommentsReactionsFeedback

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में संबोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर तुर्की का रुख सामने रखा। एर्दोगन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मौजूदा दौर के संघर्षों और संकटों से प्रभावी तरीके से निपटने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है। उन्होंने गाजा, यूक्रेन, ईरान, लेबनान, सूडान और म्यांमार समेत कई क्षेत्रों में जारी संघर्षों का उल्लेख किया और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया।


UN सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग
एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसके व्यापक सुधार की मांग की। उन्होंने कहा कि 190 से अधिक देशों की इच्छा केवल पांच स्थायी सदस्यों के फैसलों पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए। एर्दोगन ने लंबे समय से दिए जा रहे अपने संदेश को दोहराते हुए कहा कि दुनिया पांच देशों से बड़ी है। उनके मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया ज्यादा प्रतिनिधित्व वाली और भरोसेमंद होनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी कार्रवाई की जा सके।


गाजा और फिलिस्तीन का मुद्दा भाषण के केंद्र में रहा
एर्दोगन ने अपने भाषण में गाजा की स्थिति को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने फिलिस्तीनी लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ाने और फिलिस्तीन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की अपील की। उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों की स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संकट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुर्की के राष्ट्रपति ने फिलिस्तीनी राज्य के गठन और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात भी दोहराई।
 

कश्मीर मुद्दे का भी किया जिक्र
एर्दोगन ने अपने UNGA संबोधन में दक्षिण एशिया और कश्मीर मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर समेत दक्षिण एशिया के सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद पर तुर्की के पूर्व रुख के अनुरूप है। उनके इस बयान को लेकर भारतीय संदर्भ में भी चर्चा हुई, क्योंकि भारत लगातार जम्मू-कश्मीर को अपना आंतरिक मामला बताते हुए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर आपत्ति जताता रहा है।


यूक्रेन और दूसरे क्षेत्रीय संघर्षों पर भी बात
एर्दोगन ने अपने संबोधन और UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात के दौरान यूक्रेन, ईरान, मध्य पूर्व और साइप्रस सहित कई क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार गुटेरेस और एर्दोगन ने साइप्रस, यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति पर विचार साझा किए। एर्दोगन ने अलग-अलग संघर्षों में तनाव कम करने और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। तुर्की ने यूक्रेन और रूस के बीच कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की भूमिका भी निभाई है।


वैश्विक व्यवस्था में बदलाव पर एर्दोगन का जोर
एर्दोगन के भाषण का व्यापक संदेश संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ते संघर्षों के बीच ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें सभी देशों को अधिक समान प्रतिनिधित्व और अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून को सभी देशों पर समान रूप से लागू किए जाने की बात भी कही। एर्दोगन के संबोधन में गाजा और फिलिस्तीन के साथ-साथ कश्मीर, यूक्रेन और अन्य क्षेत्रीय संकटों का उल्लेख यह दिखाता है कि तुर्की वैश्विक सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका को सक्रिय रूप से सामने रख रहा है।

 

प्रतिक्रियाएँ
Anil Sen

Anil Sen

0 सेकंड पहले

International politics bahut tezi se badal rahi hai.

CommentsReactionsFeedback

खबरे और भी है...