Israel Knesset Explained: इजराइल की संसद का नाम नेसेट क्यों है?

इजराइल की संसद का नाम नेसेट क्यों है?
प्रतिक्रियाएँ
Anika Rajput

Anika Rajput

5 घंटे पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

6 घंटे पहले

India ka is maamle mein kya role hoga?

Ayaan Khan

Ayaan Khan

7 घंटे पहले

Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Diya Gupta

Diya Gupta

8 घंटे पहले

Poori duniya is khabar par nazar rakh rahi hai.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

10 घंटे पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

11 घंटे पहले

Hum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

12 घंटे पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

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इजराइल की संसद का नाम नेसेट क्यों है?
इजराइल की संसद को ‘नेसेट’ कहा जाता है। यह हिब्रू भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ सभा या जमावड़ा होता है। यह शब्द लोगों के एकत्र होने की अवधारणा से जुड़ा है। यहूदी प्रार्थनास्थल के लिए इस्तेमाल होने वाला हिब्रू शब्द ‘बेत नेसेट’ भी इसी परंपरा से संबंधित है, जिसका अर्थ मिलने-जुलने का घर माना जाता है। आधुनिक संसद के इस नाम के पीछे यहूदी इतिहास और प्राचीन परंपराओं का संबंध बताया जाता है।

 

प्राचीन ग्रेट असेंबली से जुड़ा है 120 सीटों का इतिहास
नेसेट का नाम प्राचीन ‘नेसेट हगदोला’ यानी ‘ग्रेट असेंबली’ से प्रेरित माना जाता है। यहूदी परंपरा के अनुसार, इस सभा में 120 विद्वान, ज्ञानी और पैगंबर शामिल थे। मान्यता है कि पांचवीं सदी ईसा पूर्व के दौरान एज्रा और नहेमायाह के समय यरुशलम में यह सभा बुलाई गई थी, जब बेबीलोन से लौटे यहूदी समुदाय को फिर से बसाया जा रहा था। आधुनिक इजराइल के संस्थापकों ने इसी ऐतिहासिक परंपरा से प्रेरणा लेकर संसद का नाम नेसेट रखा और उसके सदस्यों की संख्या भी 120 निर्धारित की। हालांकि, प्राचीन सभा के इतिहास और उसके स्वरूप को लेकर विद्वानों के बीच मतभेद रहे हैं।

 

1949 में आधुनिक नेसेट की शुरुआत
14 फरवरी 1949 को यरुशलम में जूइश एजेंसी की इमारत में संविधान सभा की पहली बैठक हुई। इसके दो दिन बाद, 16 फरवरी को ‘नेसेट’ नाम को मंजूरी दी गई और सदस्यों की संख्या 120 तय की गई। शुरुआत में संसद की बैठकें तेल अवीव में भी आयोजित हुईं, जबकि यरुशलम स्थित इसकी मौजूदा मुख्य इमारत 1966 में तैयार हुई। प्राचीन ग्रेट असेंबली और आधुनिक नेसेट के नाम तथा संख्या में समानता जरूर है, लेकिन दोनों संस्थाओं के बीच संगठनात्मक निरंतरता नहीं मानी जाती। प्राचीन सभा धार्मिक परंपरा से जुड़ी थी, जबकि आधुनिक नेसेट एक निर्वाचित विधायी संस्था है।

 

 

कैसे चुने जाते हैं सांसद और कैसे बनती है सरकार?
इजराइल में नेसेट के 120 सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुने जाते हैं। पूरे देश को एक चुनाव क्षेत्र माना जाता है और मतदाता सीधे प्रधानमंत्री के बजाय राजनीतिक दलों की सूची को वोट देते हैं। पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में सीटें आवंटित होती हैं और नेसेट का सामान्य कार्यकाल चार साल का होता है। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। चूंकि किसी एक पार्टी को अक्सर अपने दम पर बहुमत नहीं मिलता, इसलिए कई दल मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं। इस व्यवस्था में छोटे दलों को भी प्रतिनिधित्व मिलता है, लेकिन सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाना सरकार गठन की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

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Anika Rajput

Anika Rajput

5 घंटे पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Harsh Pandya

Harsh Pandya

6 घंटे पहले

India ka is maamle mein kya role hoga?

Ayaan Khan

Ayaan Khan

7 घंटे पहले

Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Diya Gupta

Diya Gupta

8 घंटे पहले

Poori duniya is khabar par nazar rakh rahi hai.

Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

10 घंटे पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

11 घंटे पहले

Hum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

12 घंटे पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

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