Rainwater Conservation Drive: भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए सरकार का नया प्लान

भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए सरकार का नया प्लान
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बारिश की हर बूंद बचाने पर जोर
देशभर में बारिश के पानी को सहेजने और भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लोगों को वर्षा जल संग्रह, तालाबों के पुनरुद्धार और जमीन के भीतर पानी पहुंचाने वाली संरचनाएं बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की जल संचय जन भागीदारी पहल में भी स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर दिया गया है।

 

1.55 करोड़ से ज्यादा जल संरचनाएं बनाई गईं
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाएं बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को जमा करना और उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है, ताकि पानी की कमी से प्रभावित क्षेत्रों को राहत मिल सके।

 

23 लाख संरचनाओं के आकलन में सामने आया अनुमान
पहले चरण के प्रभाव का आकलन करने के लिए करीब 23 लाख संरचनाओं का अध्ययन किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 1 जून से 31 दिसंबर 2025 के बीच इन प्रयासों से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान लगाया गया। यह अध्ययन आधारित अनुमान है; वास्तविक परिणाम बारिश, मिट्टी की बनावट और पानी के उपयोग जैसे कारकों से प्रभावित हो सकते हैं।

 

क्या है ‘कैच द रेन’ अभियान?
‘कैच द रेन’ अभियान की शुरुआत 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर की गई थी। इसका उद्देश्य बारिश जहां और जब हो, वहां पानी को सहेजना और उसे बेकार बहने से रोकना है। इसके तहत घरों, स्कूलों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है।

 

तालाबों और पुराने जल स्रोतों को सुधारने पर ध्यान
अभियान में तालाबों और पुराने जल स्रोतों की सफाई, रिचार्ज पिट बनाने और खराब पड़े बोरवेल को दोबारा उपयोगी बनाने जैसे उपाय शामिल हैं। पेड़ लगाने और हरियाली बढ़ाने को भी प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि इससे मिट्टी का कटाव कम करने और स्थानीय जल व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

 

जल संचय जन भागीदारी के पहले और दूसरे चरण
जल संचय जन भागीदारी पहल के पहले चरण यानी JSJB 1.0 को 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक लागू किया गया। इसमें समुदायों, कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) और लागत प्रभावी उपायों के जरिए जल संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके बाद 1 जून 2025 को JSJB 2.0 शुरू किया गया, जिसमें भूजल की गंभीर स्थिति वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

2026 की पहल में समुदायों की भागीदारी
1 जून 2026 को शुरू की गई JSJB: Catch the Rain पहल में जल संचय जन भागीदारी और ‘कैच द रेन’ अभियान को साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों को जोड़कर जल संरक्षण के काम किए जाने की बात कही गई है। ग्राम पंचायतों, शहरी निकायों, महिला समूहों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी भी इस प्रयास का अहम हिस्सा है।

 

जल शक्ति केंद्रों की भूमिका
जल शक्ति केंद्र लोगों को वर्षा जल संग्रह की तकनीक, भूजल रिचार्ज और स्थानीय जल संरक्षण योजनाओं के बारे में जानकारी देने में मदद करते हैं। इनके जरिए प्रशासन और समुदाय इलाके की बारिश, जमीन की बनावट और पानी की जरूरत के अनुसार उपाय तय कर सकते हैं। जल संरचनाओं का नियमित रखरखाव और उनके प्रभाव की निगरानी जरूरी है, ताकि इन प्रयासों का लाभ लंबे समय तक मिल सके।

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